Famous Temples in Bihar: बिहार की संस्कृति और इतिहास भारत के अन्य देशों से बिल्कुल अलग है। यहां पर आपको कई आध्यात्मिक स्थान देखने को मिलेंगे जिनकी अपनी अनोखी कहानी और इतिहास है। बिहार घूमने जा रहे हैं तो यहां के प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करना न भूलें।
बिहार के प्रसिद्ध मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)

बिहार का इतिहास काफी प्रसिद्ध और समृद्ध है। यह जगह आध्यात्मिकता और ज्ञान का अपार भंडार समेटे हुए है। यहां पर धर्म और संस्कृति का अनोखा संगम देखा जा सकता है। बिहार में हिंदू ही नहीं बल्कि सिख, बौद्ध और जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। अगर आप इस बार बिहार दर्शन करना चाहते हैं तो यहां के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें। जहां आपको शांति और आध्यात्मिकता का संगम देखने को मिलेगा।

महाबोधि मंदिर गया जिले के पाव धरती के पास स्थित यह जगह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है। इसकी ऊंचाई करीब 170 फीस है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह स्थान सबसे पवित्र है। यहीं पर भगवान बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। बोधगया में निरंजना नदी के तट पर स्थित यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। मन की शांति के लिए इस जगह पर एक बार जरूर आएं।

मिथिला शक्तिपीठ बिहार के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह भारत नेपाल की सीमा पर स्थित है। यहां दुनियाभर से पर्यटक लाखों की संख्या में आते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे 52 शक्तिपीठों में शामिल किया गया है। कहा जाता है कि देवी सती का बायां कंधा यहां गिरा था।

सासाराम का मां ताराचंडी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि इस जगह पर सती के नेत्र गिरे थे। यहां मां सती की मां ताराचंडी के रूप में पूजा की जाती है। यह मंदिर पहाड़ियों पर बसा बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। यहां से आप रोहतास किला भी देख सकते हैं।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर कैमूर में स्थित भारत का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि यह करीब 2 हजार साल पुराना है। यहां मां मुंडेश्वरी और भगवान शिव की आराधना की जाती है। यह मंदिर अष्टकोणीय संरचना में बना है जो भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

बिहार का प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में पूजा के लिए भगवान विष्णु के पैरों के निशान रखे गए हैं। भारत से लोग पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए यहां पिंडदान करने आते हैं।

पाटन देवी पटना का सबसे पुराना जीवित मंदिर परिसर है और इसे पूजनीय शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि यहां देवी सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। बड़ी पाटन देवी और छोटी पाटन देवी, इन दोनों मंदिरों में काले पत्थर और धातु से बनी दुर्गा, काली, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां स्थापित हैं।

मंगला गौरी मंदिर पहाड़ी पर स्थित विवाह, प्रजनन क्षमता और समृद्धि के आशीर्वाद से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है। लगभग 100 सीढ़ियां चढ़कर एक छोटे से प्रांगण में पहुँचा जा सकता है जहाँ देवी की शांत पाषाण रूप में पूजा की जाती है।






