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Kanchipuram: ‘हजारों मंदिरों का शहर’ जहां बसती है आध्यात्मिकता और पल्लव काल की भव्य विरासत

Kanchipuram Temple Tour: कांचीपुरम को 'हजारों मंदिरों का शहर' कहा जाता है। यह शहर अपने 2000 साल पुराने इतिहास, भव्य द्रविड़ वास्तुकला और प्रसिद्ध कामाक्षी अम्मन मंदिर के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Mar 22, 2026 | 07:00 AM

कांचीपुरम 'हजारों मंदिरों का शहर' (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Ancient Temples In Tamilnadu: तमिलनाडु में स्थित कांचीपुरम को ‘हजारों मंदिरों का शहर’ कहा जाता है जो अपनी समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है। यह शहर न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है बल्कि अपनी अद्भुत वास्तुकला से विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। देश के सात मोक्षपुरी शहरों में से एक होने के नाते यहां का हर कोना शांति और भक्ति का गहरा अनुभव प्रदान करता है। अगर आप प्राचीन इतिहास और संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं तो जीवन में एक बार कांचीपुरम की यात्रा अवश्य करें।

ऐतिहासिक विरासत का संगम

कांचीपुरम का इतिहास लगभग दो हजार साल पुराना है और यह प्रसिद्ध पल्लव राजवंश की ऐतिहासिक राजधानी हुआ करती थी। चौथी से लेकर नौवीं शताब्दी तक यहां पल्लवों का शासन रहा जिसके बाद चोल और विजयनगर राजाओं ने भी यहां शासन किया। इन महान राजवंशों ने शहर में कई भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया जो आज भी अपनी मूल सुंदरता और भव्यता के साथ खड़े हैं।

एकंबरेश्वर और कामाक्षी मंदिर

एकंबरेश्वर मंदिर कांचीपुरम का सबसे बड़ा मंदिर है जो लगभग 23 एकड़ के विशाल क्षेत्र में पूरी भव्यता के साथ फैला हुआ है। यहां भगवान शिव की लिंग स्वरूप में पूजा की जाती है और इसका दक्षिणी गोपुरम 192 फीट ऊंचा होने के कारण प्रसिद्ध है। शहर के बीचों-बीच स्थित कामाक्षी अम्मन मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है जहां देवी सती की पूजा होती है। लगभग 5 एकड़ में फैले इस मंदिर में देवी कामाक्षी पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं जो भक्तों को रूहानी सुकून प्रदान करती हैं।

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वास्तुकला के अनूठे नमूने

कांची कैलाशनाथ मंदिर को राजसिंहेश्वरम के नाम से भी पुकारा जाता है और यह मंदिर भगवान शिव को पूरी तरह समर्पित है। इस मंदिर के परिक्रमा मार्ग में बनी भव्य मूर्तियां और उनकी बारीक नक्काशी पल्लव काल की कलात्मक श्रेष्ठता का प्रतीक मानी जाती हैं। वरदराजा पेरुमल मंदिर में भगवान विष्णु की 40 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा है जिसे अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनाया गया है। इस मंदिर के स्तंभों पर की गई नक्काशी और विशाल हॉल पर्यटकों को अपनी ओर खींचने का एक बहुत बड़ा मुख्य आकर्षण हैं।

विष्णु और शिव के अन्य मंदिर

श्री वैकुंठ पेरुमल मंदिर की खासियत इसके एक के ऊपर एक बने तीन गर्भगृह हैं जहां भगवान विष्णु तीन अलग मुद्राओं में हैं। यह मंदिर 108 दिव्य देशम में गिना जाता है जो वैष्णव भक्तों के लिए एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना गया है। श्री मुक्तेश्वरार मंदिर कांची के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है जहां प्रवेश द्वार पर नटराज की बहुत ही आकर्षक मूर्ति है। इसी प्रकार इरावतनेश्वर मंदिर में लोग अपने बच्चों के लिए आशीर्वाद लेने आते हैं क्योंकि यहां का गर्भगृह विशेष गोल आकार का है।

दुर्लभ और जैन मंदिर

कांचीपुरम में चित्रगुप्त देवता को समर्पित एक दुर्लभ मंदिर भी स्थित है जो यम देव के सहायक माने जाते हैं और कर्मों का हिसाब रखते हैं। इसके साथ ही त्रिलोक्यनाथ मंदिर जैन धर्म को समर्पित है जो इस शहर की धार्मिक विविधता और समावेशी संस्कृति को पूरी तरह प्रदर्शित करता है। यहां का हर मंदिर अपनी विशिष्ट डिजाइन और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए दुनिया भर में मशहूर है जिसे देखने विदेशी पर्यटक भी आते हैं। इन मंदिरों का भ्रमण करना न केवल धार्मिक यात्रा है बल्कि यह भारत के स्वर्णिम इतिहास और कला का एक जीवंत दर्शन भी है।

यह भी पढ़ें: नवरात्रि 2026: IRCTC लाया वैष्णो देवी का किफायती टूर पैकेज, 6,990 में करें माता के दर्शन

कैसे पहुंचे कांचीपुरम

कांचीपुरम जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा चेन्नई है जो यहां से लगभग 72 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी या बस की मदद से बहुत ही आसानी से इस ऐतिहासिक शहर तक कम समय में पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए कांचीपुरम रेलवे स्टेशन उपलब्ध है जहां दिल्ली से केरल एक्सप्रेस और संपर्क क्रांति चलती हैं। परिवहन की बेहतर सुविधाओं के कारण तमिलनाडु के किसी भी मुख्य शहर से यहां पहुंचना पर्यटकों के लिए काफी सरल और सुविधाजनक है।

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Published On: Mar 22, 2026 | 07:00 AM

Topics:  

  • Tamilnadu News
  • Tour and Travel News

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