रणकपुर में स्थित है तीर्थंकर ऋषभनाथ का ये सुप्रसिद्ध मंदिर, प्राचीन वास्तुशिल्प के लिए है प्रसिद्ध
अगर आप वास्तुशिल्प में रूची रखते है और प्राचीन मंदिरों और भारत की पुरानी सभ्यताओं को जानने के इच्छुक है तो ये जगह आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है। यहां आप परिवार के साथ घूमने आ सकते है और साथ ही बच्चों के लिए भारतीय वास्तुशिल्प को जानने का यह सुनहरा स्थान है।
- Written By: प्रिया जैस
रणकपुर जैन मंदिर (सौजन्य-एक्स)
नवभारत डेस्क: रणकपुर जैन मंदिर को चतुर्मुख धरण विहार के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर राजस्थान में जोधपुर और उदयपुर के बीच पाली जिले के सादड़ी शहर के पास रणकपुर गांव में स्थित है। जो जोधपुर से 162 किमी और उदयपुर से 91 किमी की दूरी पर मौजूद है। जैन धर्म की वास्तुशिल्प में रूची रखने वाले पर्यटकों को एक बार यहां जरूर आना चाहिए।
राजस्थान का यह गांव रणकपुर जैन धर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। ये जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यह सबसे ज्यादा इन प्राचीन मंदिरों में की गई अपनी खूबसूरत तराशी गई नक्काशी के लिए फेमस है। यह जैन मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। जिसे देखना एक अद्भुत आनंद है।
चौमुख मंदिर
इन मंदिरों का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था। यही कारण है कि इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा। यह एक चौमुख मंदिर है जो पहले जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ जिन्हें आदीनाथ को समर्पित है। यह मंदिर चारों दिशाओं में खुलता है इसलिए इसे चौमुख मंदिर भी कहा जाता है।
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रणकपुर का यह मंदिर संगमरमर से बना है जिसमें 29 भव्य कमरे है। इस मंदिर में 1444 खंबे है जिसकी खासियत ये है कि इन पर की गई नक्काशी के साथ ही ये सभी एक-दूसरे बिल्कुल अलग है। यहां के गलियारे, यहां की दीवारों की नक्काशी वाकई बेहद खूबसूरत है।
रणकपुर जैन मंदिर (सौजन्य-एक्स)
यहां के सभी मंडपों के शिखर में एक घंटी मौजूद है। जो हवा के साथ बजती है और जिसकी आवाज पूरे मंदिर में गूंजती है। मंदिर परिसर में ही नेमीनाथ और पारसनाथ को समर्पित दो मंदिर है जिनमें बेगद खूबसूरत नक्काशी उकेरी गई है। साथ ही लगभग 1 किमी दूर अंबा माता का मंदिर भी है।
आसपास घूमने की जगह
रणकपुर के आसपास भी कई घूमने लायक जगह है जिसमें अन्य प्राचीन मंदिर शामिल है। जहां की खूबसूरती आपको मनमोह लेती है। जिससे आप उस समय के कारीगरों की तारीफें करते नहीं थकेंगे।
सादडी
रणकपुर से 8 किमी की दूर पर सादडी स्थित है। सादडी में खुदाबक्श बाबा की पुरानी दरगाह है और साथ ही कुछ खूबसूरत देखने लायक मंदिर भी है। इनमें से सबसे प्राचीन मंदिर वराहअवतार मंदिर और चिंतामणि पार्स्वानाथ मंदिर हैं।
देसुरी
रणकपुर से 25 किमी की दूरी पर भगवान शिव, हनुमान और नवी माता को समर्पित तीन मंदिर है। इसके अलावा यहां एक पुरानी मस्जिद भी है। यहां पास ही में कुभलगढ़ तहसील के अंतर्गत परशुराम महादेव का भी एक मंदिर है।
मुच्छल महावीर
अपने नाम के अनुरूप इस मंदिर में मूछों में भगवान महावीर की प्रतिमा है। ये मंदिर कुंभलगढ़ अभ्यारण्य में स्थित है। यहां रहनेवाली गरासिया जनजाति के आकर्षक पहनावे पर्यटकों को लुभाते है।
कैसे पहुंचे रणकपुर
हवाई मार्ग
रणकपुर के लिए नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर है। यहां दिल्ली और मुंबई से यहां के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग
रणकपुर के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन फालना व रानी जिला पाली है। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से रेलगाडि़यां उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग
रणकपुर उदयपुर से 98 किलोमीटर दूर है। यह स्थान देश के प्रमुख शहरों से सड़कों के जरिए जुड़ा हुआ है। जहां के लिए फालना बस की सेवा भी उपलब्ध है।
