UPI Payment (Source. Design)
UPI Transaction Charges Extra Amount: क्या आप भी दिन की शुरुआत चाय वाले को QR स्कैन करके पेमेंट से करते हैं और सब्ज़ी, किराना, दवा से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक हर जगह UPI का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो आने वाला केंद्रीय बजट 2026 आपकी इस आदत को महंगा बना सकता है। जिस UPI को अब तक फ्री और आसान माना जाता था, उस पर चार्ज लगने की चर्चा ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत में डिजिटल क्रांति की पहचान बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज अरबों ट्रांजेक्शन संभाल रहा है। लेकिन पेमेंट कंपनियों और बैंकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन को मुफ्त में चलाना अब आसान नहीं रहा। पूरा पेमेंट इकोसिस्टम धीरे-धीरे वित्तीय दबाव की ओर बढ़ रहा है।
फरवरी में आने वाले बजट 2026 से पहले देश की बड़ी पेमेंट कंपनियों और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने वित्त मंत्रालय के सामने अपनी दो बड़ी मांगें रखी हैं:
फिलहाल UPI ट्रांजेक्शन पर न तो ग्राहक और न ही दुकानदार से कोई चार्ज लिया जाता है। सरकार इसके बदले पेमेंट कंपनियों को सब्सिडी देती है। लेकिन कंपनियों का कहना है कि मौजूदा सब्सिडी “ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर” है। पिछले साल UPI के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई, जबकि इंडस्ट्री के अनुसार यह राशि कम से कम 5,000-6,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी। 2025 में अनुमानित जरूरत 6,000 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे करीब 4,500 करोड़ रुपये का शॉर्टफॉल सामने आया।
पेमेंट कंपनियों ने सुझाव दिया है कि जिन बड़े व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से ज्यादा है, उन पर 0.30% MDR फिर से लागू किया जाए। इसके साथ ही RuPay डेबिट कार्ड पर भी अन्य डेबिट कार्ड की तरह चार्ज लगाने की मांग की गई है।
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अगर MDR लागू होता है तो इसका बोझ सीधे दुकानदार पर पड़ेगा। ऐसे में व्यापारी या तो सामान की कीमत बढ़ा सकते हैं या फिर ग्राहकों से अतिरिक्त चार्ज वसूल सकते हैं, जैसा पहले क्रेडिट कार्ड पेमेंट में देखा गया है।
PlutosOne के फाउंडर का मानना है कि UPI को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने और नई तकनीक विकसित करने के लिए कंपनियों के पास पर्याप्त फंड होना जरूरी है। कंपनियों का कहना है कि जीरो MDR मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है, खासकर तब जब UPI हर महीने 21.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन संभाल रहा हो।
अब सभी की नजरें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिकी हैं। क्या सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन को फ्री रखने के लिए सब्सिडी बढ़ाएगी या फिर बड़े व्यापारियों पर चार्ज लगाकर पेमेंट कंपनियों को राहत देगी? इसका जवाब बजट 2026 में ही मिलेगा।