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स्पैडेक्स उपग्रहों के बीच 230 मीटर की दूरी है, जानें कब होगी डॉकिंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SpaDeX) में एक तकनीकी परेशानी गई थी, जिसके कारण एक्सपेरिमेंट को टालना पड़ा।

  • Written By: शिवानी मिश्रा
Updated On: Jan 11, 2025 | 10:12 PM

स्पैडेक्स उपग्रहों (कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)

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नवभारत डेस्क : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SpaDeX) में एक तकनीकी परेशानी गई थी, जिसके कारण एक्सपेरिमेंट को टालना पड़ा। हलांकि अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा है कि वो जिन दो स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट उपग्रहों को कक्षा में एकीकृत करना चाहता है, उनके बीच वर्तमान में 230 मीटर की दूरी है तथा वे ‘सामान्य’ हालत में हैं। शुक्रवार शाम उपग्रहों के बीच की दूरी 1.5 किलोमीटर थी।

अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा- सभी सेंसर का मूल्यांकन किया जा रहा है। अंतरिक्ष यान की स्थिति सामान्य है। अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘डॉकिंग’ प्रयोगों के संचालन की तारीख के बारे में कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। जो उपग्रहों को अंतरिक्ष में एकीकृत करेगा। स्पैडेक्स परियोजना पहले ही 7 और 9 जनवरी को ‘डॉकिंग’ प्रयोगों के लिए घोषित दो समय सीमा को चूक गई है। इसरो ने 30 दिसंबर को स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था।

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अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन

इसके साथ ही स्पैडेक्स मिशन दो छोटे अंतरिक्ष यान का उपयोग कर अंतरिक्ष में डॉकिंग के लिए एक किफायती प्रौद्योगिकी मिशन है जिसे पीएसएलवी के द्वारा लॉन्च किया गया था। ये प्रौद्योगिकी भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं जैसे चंद्रमा पर भारतीय मिशन, चंद्रमा से नमूने वापस लाना, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और संचालन आदि के लिए आवश्यक है। इस मिशन के माध्यम से, भारत अंतरिक्ष डॉकिंग प्रौद्योगिकी रखने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है।

बता दें कि स्पाडैक्स एक टेक्नोलॉजी ड्रिवेन मिशन है जिसे इसरो द्वारा अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए डेवलपर किया गया है। इसरो के इस मिशन का उद्देश्य दो छोटे अंतरिक्ष यान या सैटेलाइट को एक साथ लाने यानी की डॉक करने और अलग करने यानी की अनडॉक करने की क्षमता का प्रदर्शन करना है। स्पैडेक्स का प्राथमिक लक्ष्य, पृथ्वी की निचली कक्षा में दो छोटे अंतरिक्ष यान, SDX01 और SDX02 के लिए डॉकिंग टेक्नोलॉजी डेवलपर करना है। इस तकनीक में हाईटेक सेसिंग और प्रोपल्सन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो स्वायत्त रूप से डॉकिंग करने का काम करेगा। आपको जानकारी के लिए बता दें, कि इसरो का ये मिशन दो साल तक चलने वाला है।

There is a distance of 230 meters between the spadex satellites know when the docking will happen

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Published On: Jan 11, 2025 | 10:12 PM

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