Meta AI Glasses से बढ़ी प्राइवेसी की चिंता, आपकी हर बात और हर कदम रखेंगे याद, जानिए कैसे करेंगे काम
Meta AI Glasses: Meta अब ऐसी नई AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है जो स्मार्ट ग्लासेस को पहले से कहीं ज्यादा एडवांस बना सकती है। कंपनी ऐसे AI-पावर्ड Smart Glasses तैयार कर रही है जो काफी कुछ कर सकता है।
- Written By: सिमरन सिंह
Meta AI Glasses (Source. Meta)
Super Sensing In Meta AI Glasses: Meta अब ऐसी नई AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है जो स्मार्ट ग्लासेस को पहले से कहीं ज्यादा एडवांस बना सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार कंपनी ऐसे AI-पावर्ड Smart Glasses तैयार कर रही है जो यूजर की हर गतिविधि को समझने और याद रखने में सक्षम होंगे। इसमें सब कुछ शामिल है जैसे आप क्या देख रहे हैं, क्या सुन रहे हैं और दिनभर कहां-कहां गए यह सारी जानकारी ये स्मार्ट ग्लासेस समझ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर AI असिस्टेंट की तरह आपको बता भी सकेंगे। लेकिन इस नई तकनीक ने लॉन्च से पहले ही प्राइवेसी को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
क्या है Meta का Super Sensing फीचर?
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि Meta इस प्रोजेक्ट पर Super Sensing नाम दिया गया है। जिसमें मौजूदा स्मार्ट ग्लासेस में कुछ AI फीचर्स को मैन्युअली ऑन करना पड़ता है लेकिन नए मॉडल में यह सुविधा हमेशा सक्रिय रहने की संभावना है। बताया जा रहा है कि स्मार्ट ग्लासेस लगातार आसपास के विजुअल और ऑडियो इनपुट को समझेंगे और उसका संदर्भ Meta AI तक पहुंचाएंगे। इससे AI यूजर के सवालों का ज्यादा सटीक जवाब दे सकेगा। उदाहरण के लिए बताए तो अगर आप दिन के अंत में पूछें कि पूरे दिन क्या-क्या हुआ तो AI आपको महत्वपूर्ण घटनाओं का सार बता सकेगा।
हर कुछ सेकंड में फोटो और ऑडियो कैप्चर करेंगे ग्लासेस
अभी सामने आई जानकारी में कहा जा रहा है कि Meta के प्रोटोटाइप स्मार्ट ग्लासेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे हर कुछ सेकंड में तस्वीरें कैप्चर करेंगे और आसपास की आवाजों को भी सुनते रहेंगे। कंपनी का दावा है कि फोटो और ऑडियो रिकॉर्डिंग को स्थायी रूप से स्टोर नहीं किया जाएगा। इसकी जगह केवल मेटाडेटा सर्वर पर भेजा जाएगा ताकि AI बेहतर तरीके से यूजर की मदद कर सके।
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प्राइवेसी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इस नई तकनीक को लेकर Meta का कहना है कि रिकॉर्डिंग स्थायी रूप से सेव नहीं होगी लेकिन विशेषज्ञों की चिंता कुछ और ही है। जिसमें सबसे बड़ा सवाल सर्विलांस और यूजर की सहमति को लेकर उठ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस Super Sensing फीचर के दौरान ग्लासेस का LED इंडिकेटर बंद रह सकता है क्योंकि इसे फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग की बजाय AI फंक्शन माना जा रहा है। ऐसे में आसपास मौजूद लोगों को यह पता ही नहीं चलेगा कि उनकी गतिविधियां रिकॉर्ड हो रही हैं या नहीं।
जानकारी के लिए बता दें कि Meta पहले भी डेटा प्राइवेसी और फेशियल रिकग्निशन से जुड़े विवादों का सामना कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर यह तकनीक बाजार में आती है तो इसके साथ सख्त प्राइवेसी नियम और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी होगी। फिलहाल यह साफ है कि AI की दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है लेकिन इसके साथ यूजर्स की निजता की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
