ऑनलाइन गेमिंग के लिए सख्त नियम की जरूरत! पढ़े ये रिपोर्ट
इसमें बताया गया है कि अन्य महत्वपूर्ण उपायों में जन जागरूकता और शिक्षा प्रदान करना शामिल है, जिससे यूजर्स सतर्क निर्णय ले सकें और भ्रामक व्यवहार में संलग्न मंच से बच सकें।
- Written By: शिवानी मिश्रा
भारतीय रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) क्षेत्र वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2022-23 तक ये 28 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ वैश्विक बाजार में सबसे आगे है
नई दिल्ली: तेजी से बढ़ते इंडियन ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इसकी निरंतर सफलता सुनिश्चित करने तथा देश की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अवश्यकता है।
बता दें कि डिजिटल इंडिया फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में अवैध परिचालकों से निपटने के लिए एक कानून बनाने तथा वैध संचालकों की श्वेत सूची बनाने, भ्रामक विज्ञापनों से निपटने और फाइनेंशियल क्राइसिस तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सिद्धांतों को शामिल करने की सलाह दी गई है।
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7.5 अरब का होगा गेमिंग मार्केट
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन
इसमें बताया गया है कि अन्य महत्वपूर्ण उपायों में जन जागरूकता और शिक्षा प्रदान करना शामिल है, जिससे यूजर्स सतर्क निर्णय ले सकें और भ्रामक व्यवहार में संलग्न मंच से बच सकें। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) क्षेत्र वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2022-23 तक ये 28 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ वैश्विक बाजार में सबसे आगे है। अगले पांच वर्षों में इस क्षेत्र का राजस्व 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
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जरूरी है कड़े कानून
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक अरविंद गुप्ता ने कहा कि अवैध परिचालकों पर अंकुश लगाने के नियामकीय कोशिशों के बावजूद कई मंच मिरर साइट्स, अवैध ब्रांडिंग तथा असंगत वादों के जरिये प्रतिबंधों को दरकिनार कर दिया जाता हैं। यह स्थिति कड़ी निगरानी और प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है ।
