फोन लॉक हो या फ्लाइट मोड ऑन, फिर भी हो सकती है निगरानी? क्या नई टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई चिंता?
Smartphone Tracking Technology: चीनी रिसर्च के मुताबिक, लॉक या फ्लाइट मोड में भी स्मार्टफोन से निकलने वाले सिग्नल के जरिए ऐप की पहचान की जा सकती है। फिलहाल यह तकनीक लैब तक सीमित है।
- Written By: अनन्या तिवारी
सांकेतिक फोटो (सोर्स-AI)
Smartphone Can Be Tracked Through Electromagnetic Signals: अगर आपको लगता है कि स्मार्टफोन को लॉक कर देने, फ्लाइट मोड ऑन करने या इंटरनेट बंद करने के बाद आपकी एक्टिविटी को कोई ट्रैक नहीं कर सकता, तो एक नई रिसर्च इस धारणा को चुनौती देती है। चीन के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि स्मार्टफोन से निकलने वाले बेहद कमजोर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (EM) सिग्नल का विश्लेषण करके यह पता लगाया जा सकता है कि फोन में कौन-सा ऐप चल रहा है और यूजर क्या कर रहा है।
हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती रिसर्च चरण में है और इसका परीक्षण केवल नियंत्रित लैब माहौल में किया गया है। फिलहाल यह आम लोगों के लिए कोई व्यावहारिक निगरानी तकनीक नहीं बनी है।
यह है नई तकनीक
चीन की पीपुल्स पब्लिक सिक्योरिटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को डिजिटल फोरेंसिक के लिए विकसित किया है। यह एक नॉन-कॉन्टैक्ट फोरेंसिक तकनीक है, यानी बिना फोन को अनलॉक किए, बिना ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंच बनाए और बिना डेटा निकाले भी कुछ तकनीकी संकेत हासिल किए जा सकते हैं।
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रिसर्च के मुताबिक, जब स्मार्टफोन काम करता है तो उसके हार्डवेयर से बेहद कमजोर लो-फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल निकलते हैं। अलग-अलग ऐप और अलग-अलग गतिविधियों के दौरान इन सिग्नलों का पैटर्न बदल जाता है। इन्हीं पैटर्न का एनालिसिस करके यह अनुमान लगाया जा सकता है कि फोन में कौन-सा ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है।
99 प्रतिशत से ज्यादा सटीकता का दावा
रिसर्च टीम ने इस तकनीक का परीक्षण iPhone 15 Pro, Xiaomi 15 Pro और Oppo Reno 13 जैसे स्मार्टफोन्स पर किया। शोधकर्ताओं का दावा है कि उनका AI मॉडल 99.07 प्रतिशत सटीकता के साथ यह पहचानने में सफल रहा कि फोन में कौन-सा ऐप चल रहा था।
टेस्टिंग के दौरान Douyin, WeChat Video Call, Baidu Maps, SMS, Browser, Camera और Cloud Storage जैसे ऐप शामिल किए गए।
इसके अलावा, मॉडल ने करीब 95.61% सटीकता के साथ यह भी पहचान लिया कि यूजर वीडियो या ऑडियो को रोक रहा है, सामान्य स्पीड पर चला रहा है या दो गुना स्पीड पर देख रहा है। इसके लिए YouTube, Bilibili और Tencent Video जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया।
ऐसे होती है सिग्नल से ऐप की पहचान
हर मोबाइल ऐप फोन के हार्डवेयर का अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करता है। कुछ ऐप प्रोसेसर और ग्राफिक्स चिप पर ज्यादा दबाव डालते हैं, जबकि कुछ GPS, Wi-Fi, स्टोरेज कंट्रोलर या वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम को ज्यादा एक्टिव रखते हैं।
हार्डवेयर के इस अलग-अलग इस्तेमाल से बिजली की खपत का पैटर्न बदलता है, जिससे अलग-अलग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल निकलते हैं। AI इन्हीं सिग्नल पैटर्न को पहचानकर यह अनुमान लगाता है कि फोन में कौन सा ऐप और किस तरह की एक्टिविटी चल रही है।
ऐसे जुटाए गए रिसर्च में सिग्नल
चीन के शोधकर्ताओं ने स्मार्टफोन के पीछे एक विशेष इंडक्शन कॉइल लगाई, जिसे हाई-प्रिसिजन डिजिटल मॉनिटरिंग रिसीवर से जोड़ा गया। इस उपकरण ने 150 किलोहर्ट्ज से 650 किलोहर्ट्ज के बीच के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल रिकॉर्ड किए।
बाद में इन सिग्नलों को टाइम-फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रोग्राम में बदला गया और डीप लर्निंग बेस्ड AI मॉडल की मदद से उनका विश्लेषण किया गया। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में डिजिटल जांच एजेंसियों के लिए अतिरिक्त तकनीकी साक्ष्य जुटाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
क्या आम यूजर्स को घबराने की जरूरत है
फिलहाल इस रिसर्च को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। अध्ययन में इस्तेमाल किए गए उपकरण बेहद विशेष और महंगे हैं। साथ ही, पूरे परीक्षण नियंत्रित लैब वातावरण में किए गए, जहां मॉनिटरिंग डिवाइस स्मार्टफोन के बेहद करीब रखा गया था।
रिसर्च पेपर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भीड़भाड़ वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक माहौल, अधिक दूरी या सामान्य परिस्थितियों में यह तकनीक कितनी प्रभावी होगी। यानी अभी यह साबित नहीं हुआ है कि असल जीवन में किसी व्यक्ति के फोन को इस तरीके से आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।
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इस दिशा में आगे होगी रिसर्च
शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में वे ऐसी तकनीक विकसित करने पर काम करेंगे जो अलग-अलग स्मार्टफोन का स्पेसिफिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक “फिंगरप्रिंट” पहचान सके। साथ ही कम विशेष उपकरणों से भी सिग्नल रिकॉर्ड करने की संभावना पर रिसर्च किया जाएगा।
रिसर्च टीम ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में स्मार्टफोन के मैग्नेटोमीटर या पहनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सेंसर की मदद से भी ऐसे सिग्नल जुटाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
