AI पर चीन की सख्ती: एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को देश से बाहर जाने से रोकने की तैयारी, जानें वजह
China Advanced AI Model Control: चीन अपनी एडवांस्ड AI तकनीक को सुरक्षित रखने के लिए टेक कंपनियों पर शिकंजा कस रहा है। सरकार AI मॉडल्स को राष्ट्रीय संपत्ति मानते हुए लीक रोकने की तैयारी में है।
- Written By: अनन्या तिवारी
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स-AI)
Chinese Government AI Security Measures For Tech Companies: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में आगे निकलने की कोशिश कर रहा चीन अब अपनी एडवांस्ड AI तकनीक को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है। अमेरिका की तरह चीन भी अत्याधुनिक AI मॉडल्स को एक अहम राष्ट्रीय संपत्ति मानने लगा है और चाहता है कि उसकी सबसे एडवांस तकनीक देश की सीमाओं के बाहर न जाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने हाल ही में देश की बड़ी टेक कंपनियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई कि एडवांस्ड AI मॉडल्स को लीक होने, चोरी होने या विदेश पहुंचने से कैसे रोका जाए।
टेक कंपनियों के साथ हुईं कई बैठकें
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, चीन के अधिकारियों ने अलीबाबा, बाइटडांस और AI स्टार्टअप Z.ai जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य देश में विकसित हो रही अत्याधुनिक AI तकनीक पर नियंत्रण बनाए रखना था।
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हालांकि, अभी तक इन AI मॉडल्स को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में विकसित होने वाले एडवांस्ड मॉडल बिना अनुमति के दूसरे देशों तक न पहुंचें।
AI लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मान रहा चीन
चीन की चिंता केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कथित तौर पर चर्चा की है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था प्रोप्राइटरी AI तकनीक को चोरी करता है या लीक करता है, तो उसके खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा, घरेलू AI स्टार्टअप्स में निवेश और विदेशी फंडिंग को लेकर भी नए नियमों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये नियम कब लागू होंगे और इनका दायरा कितना होगा।
DeepSeek के बाद बढ़ा चीन का प्रभाव
चीन के AI मॉडल्स ने पिछले कुछ समय में पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। खासतौर पर DeepSeek के R1 मॉडल के आने के बाद चीनी AI कंपनियों की चर्चा तेजी से बढ़ी। कम लागत और बेहतर प्रदर्शन के कारण इन मॉडल्स की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है।
अगर चीन अपने AI मॉडल्स की पहुंच सीमित करता है, तो इसका असर वैश्विक AI बाजार पर पड़ सकता है। कई कंपनियों के लिए AI सेवाओं की लागत बढ़ सकती है और नए नियमों के कारण अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल प्रभावित हो सकता है।
अलीबाबा और ByteDance के पास हैं बड़े AI मॉडल
चीन की बड़ी टेक कंपनियां पहले से ही कई AI मॉडल विकसित कर चुकी हैं। अलीबाबा का Qwen और ByteDance का Doubao चीन में काफी लोकप्रिय AI मॉडल्स में शामिल हैं।
इनमें कुछ मॉडल क्लोज्ड-सोर्स हैं, जबकि कुछ ओपन-वेट मॉडल हैं, जिन्हें यूजर डाउनलोड करके इस्तेमाल और कस्टमाइज कर सकते हैं। वहीं, Z.ai का GLM मॉडल भी अपनी क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
अमेरिका भी AI सुरक्षा को लेकर चिंतित
AI तकनीक को लेकर चिंता केवल चीन तक सीमित नहीं है। अमेरिका भी लंबे समय से एडवांस्ड AI मॉडल्स के गलत इस्तेमाल और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव को लेकर सतर्क रहा है।
अमेरिकी प्रशासन को डर है कि अत्याधुनिक AI तकनीक का इस्तेमाल साइबर हमले, सैन्य रणनीति या खुफिया गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने कुछ AI मॉडल्स की पहुंच और निर्यात को लेकर भी सख्त कदम उठाए हैं।
AI मॉडल्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा
AI अब केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन का हिस्सा बन चुका है। अमेरिका और चीन दोनों ही अपनी AI क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ अपनी तकनीक की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
चीन में लोकल AI स्टार्टअप्स और विदेशी सौदों की जांच भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं कोई संवेदनशील तकनीक देश से बाहर तो नहीं जा रही।
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भविष्य में और सख्त हो सकते हैं नियम
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI तकनीक को लेकर देशों के बीच नियम और कड़े हो सकते हैं। जहां एक तरफ कंपनियां तेजी से नए AI मॉडल विकसित कर रही हैं, वहीं सरकारें इन तकनीकों के इस्तेमाल, निर्यात और सुरक्षा को लेकर नए कानून बना रही हैं।
चीन का यह कदम दिखाता है कि आने वाले दौर में AI केवल इनोवेशन का क्षेत्र नहीं रहेगा, बल्कि डेटा, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा मुद्दा भी बन सकता है।
