

Smart Glasses Vs Smart Watch: टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब स्मार्टफोन के बाद ऐसे डिवाइस पर ध्यान बढ़ रहा है जिन्हें इस्तेमाल करने के लिए बार-बार फोन निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं स्मार्ट ग्लासेस इसी बदलाव का हिस्सा हैं। इनमें कैमरा, स्पीकर और AI जैसे फीचर्स मिल सकते हैं जबकि कुछ नए मॉडल लेंस के अंदर डिस्प्ले भी देते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या भविष्य में स्मार्ट ग्लासेस, स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड की जगह ले पाएंगे?
स्मार्ट ग्लासेस के बारे में बताए तो यह सामान्य चश्मे जैसे दिखते हैं लेकिन इनमें टेक्नोलॉजी के कई फीचर्स शामिल हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, Meta Ray-Ban Display में लेंस के अंदर कलर डिस्प्ले दिया गया है। जिसको लेकर कंपनी बताती है कि यूजर इसमें मैसेज, मैप, अनुवाद और दूसरी विजुअल जानकारी देख सकते हैं।
वहीं इसका फायदा यह है कि छोटी-छोटी जानकारियों के लिए हर बार स्मार्टफोन देखने की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन सभी स्मार्ट ग्लासेस में डिस्प्ले नहीं होता। कुछ मॉडल मुख्य रूप से फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग, म्यूजिक और वॉयस असिस्टेंट जैसे फीचर्स देते हैं।
स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड का इस्तेमाल सिर्फ नोटिफिकेशन देखने तक सीमित नहीं है। इनकी मदद से यूजर अपनी फिजिकल एक्टिविटी, हार्ट रेट और नींद से जुड़े आंकड़े भी देख सकते हैं। वहीं उपलब्ध फीचर्स डिवाइस के मॉडल के अनुसार अलग-अलग होते हैं।
साथ ही स्मार्टवॉच की स्क्रीन पर मैसेज पढ़ना, कॉल की जानकारी देखना और वर्कआउट ट्रैक करना आसान है। वहीं स्मार्ट ग्लासेस चलते-फिरते जानकारी देखने और हाथों को खाली रखने में मदद कर सकते हैं। जिसका सीधा मतलब है कि दोनों डिवाइस का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से हो सकता है।
स्मार्ट ग्लासेस को उपयोगी बनाने में डिस्प्ले का आकार, बैटरी, वजन और इस्तेमाल में आसानी अहम होती है। वहीं छोटे लेंस में जानकारी दिखाना और डिवाइस को आरामदायक बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती है।
इसमें प्राइवेसी भी एक बड़ा मुद्दा है। जिसमें कैमरा और माइक्रोफोन वाले चश्मों से आसपास मौजूद लोगों की रिकॉर्डिंग होने की आशंका रहती है। यूरोपीय डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ने अक्टूबर 2026 में भी स्मार्ट ग्लासेस से जुड़े डेटा सुरक्षा जोखिमों पर चिंता जताई है।
स्मार्ट ग्लासेस और पारंपरिक वियरेबल डिवाइस में से किसी एक का चुनाव हर यूजर की जरूरत पर निर्भर करेगा। अगर प्राथमिकता फिटनेस और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े हैं तो स्मार्टवॉच उपयोगी है। वहीं बिना फोन निकाले जानकारी देखने के लिए डिस्प्ले वाले स्मार्ट ग्लासेस नया विकल्प बन सकते हैं। ऐसे में अभी के लिए दोनों तकनीकों का साथ-साथ आगे बढ़ना ज्यादा संभावित है।