अब कैमरे के सामने हाथ हिलाकर साबित करनी होगी पहचान, Google ला रहा नया reCAPTCHA सिस्टम
Google reCAPTCHA: इंटरनेट की दुनिया में AI के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए है। वहीं रिपोर्ट्स में देखा गया है कि इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा AI बॉट्स हो गए है।
- Written By: सिमरन सिंह
Google reCAPTCHA (Source. Google)
CAPTCHA Verificatio: इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदल रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए है। वहीं कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इंटरनेट पर इंसानों की तुलना में AI बॉट्स का ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। इसी खतरे से निपटने के लिए Google ने अपने reCAPTCHA सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का फैसला कर लिया है। वहीं जानकारी में सामने आया है कि नए सिस्टम के तहत यूजर्स को खुद को इंसान साबित करने के लिए कैमरे के सामने हाथ हिलाना पड़ सकता है। जिसको लेकर Google का मानना है कि यह तरीका पारंपरिक CAPTCHA के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी साबित हो सकता है।
कैसे काम करेगा नया Google reCAPTCHA?
जैसा कि आपको पता है कि अब तक यूजर्स को ट्रैफिक लाइट, बस, बाइक या अन्य तस्वीरों की पहचान करके खुद को वेरिफाई करना पड़ता था। लेकिन AI तकनीक इतनी एडवांस हो चुकी है कि कई बॉट्स इन टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं। ऐसे में नए सिस्टम में जब कोई यूजर किसी वेबसाइट या सर्विस को एक्सेस करेगा तो ब्राउज़र कैमरा एक्सेस की अनुमति मांगेगा। जिसके बाद यूजर को कैमरे के सामने अपना हाथ हिलाना होगा। सिस्टम इस मूवमेंट को रिकॉर्ड करके जांच करेगा कि रिक्वेस्ट भेजने वाला व्यक्ति वास्तविक इंसान है या कोई ऑटोमेटेड बॉट।
प्राइवेसी को लेकर क्या बोले Google?
इस नए तरीके को लेकर Google ने साफ किया है कि यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा। जिसका सीधा मतलब है कि जो लोग कैमरे के जरिए वेरिफिकेशन नहीं करना चाहते वे पहले की तरह इमेज या ऑडियो CAPTCHA का इस्तेमाल कर सकेंगे। लेकिन कंपनी का दावा है कि यूजर्स की गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि हैंड मूवमेंट की रिकॉर्डिंग को किसी व्यक्ति की पहचान से नहीं जोड़ा जाएगा और इसमें ऑडियो भी रिकॉर्ड नहीं होगा। इतना ही नहीं वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद वीडियो को डिलीट कर दिया जाएगा।
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क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?
साइबर विशेषज्ञों इस बदलाव को लेकर बताते है कि AI-पावर्ड बॉट्स अब पारंपरिक CAPTCHA सिस्टम को कुछ ही सेकंड में हल कर लेते हैं। इससे फर्जी अकाउंट, स्पैम गतिविधियां और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में इससे निपटने के लिए Google ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें इंसानों की प्राकृतिक गतिविधियों को पहचानकर बॉट्स और वास्तविक यूजर्स के बीच अंतर किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले समय में यह तकनीक इंटरनेट सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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इंटरनेट सुरक्षा का नया दौर
AI के बढ़ते प्रभाव के बीच Google का यह कदम दिखाता है कि टेक कंपनियां अब सुरक्षा उपायों को भी नई तकनीक के अनुरूप अपडेट कर रही हैं। यदि यह सिस्टम सफल साबित होता है तो भविष्य में ऑनलाइन वेरिफिकेशन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
