क्या आपका फोन आपकी बातें सुन रहा है? नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, जानिए सच क्या है
Smartphone Privacy: स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि जिस चीज़ के बारे में आप घर में बात करते हैं, उसी से जुड़े विज्ञापन अचानक आपके आ जाते है।
- Written By: सिमरन सिंह
Active Listening Feature in phone (Source. AI)
Active Listening Feature In Phones: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि जिस चीज़ के बारे में आप घर में बात करते हैं, उसी से जुड़े विज्ञापन अचानक आपके मोबाइल पर दिखने लगते हैं? अब एक नई रिपोर्ट ने इस शक को और गहरा कर दिया है। 404 Media की ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्मार्टफोन सिर्फ आपकी इंटरनेट गतिविधियों को ही ट्रैक नहीं करते, बल्कि पास में रखे होने पर आपकी बातचीत भी सुन सकते हैं।
बिना सर्च किए कैसे आने लगते हैं विज्ञापन?
अक्सर लोग हैरान होते हैं कि उन्होंने किसी प्रोडक्ट को ऑनलाइन सर्च भी नहीं किया, फिर भी उससे जुड़े विज्ञापन सोशल मीडिया या ब्राउज़र पर दिखाई देने लगते हैं। यही अनुभव लोगों के मन में यह सवाल पैदा करता है क्या फोन हमारी बातें सुन रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह शक पूरी तरह बेबुनियाद नहीं है। इसमें कहा गया है कि स्मार्टफोन “active listening technology” का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आसपास की बातचीत को मॉनिटर करने में सक्षम है।
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ऐप परमिशन: सबसे बड़ी लापरवाही
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है ज्यादातर यूज़र्स ऐप इंस्टॉल करते समय बिना पढ़े ही माइक्रोफोन और अन्य परमिशन दे देते हैं। यही वह रास्ता है, जिससे ऐप्स को आपकी निजी बातचीत तक पहुंच मिल सकती है। सोचिए, अगर एक साधारण फोटो एडिटिंग ऐप माइक्रोफोन की अनुमति मांगता है, तो उसे आपकी आवाज़ की क्या जरूरत? लेकिन जल्दबाज़ी में हम “Allow” पर क्लिक कर देते हैं। रिपोर्ट का दावा है कि यह मामला सिर्फ छोटी ऐप कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी टेक कंपनियां जैसे Facebook और Google भी इसमें शामिल हो सकती हैं।
सिर्फ फोन नहीं, घर के स्मार्ट डिवाइस भी शामिल
चिंता की बात यह है कि मामला केवल स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है। आपके घर में मौजूद स्मार्ट टीवी और अन्य स्मार्ट डिवाइस भी AI तकनीक के जरिए आपकी बातचीत को सर्च हिस्ट्री से जोड़कर टारगेटेड विज्ञापन दिखा सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मीडिया इंडस्ट्री की बड़ी कंपनी Cox Media Group (CMG) ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और अन्य डिवाइस के माइक्रोफोन के जरिए बैकग्राउंड बातचीत का विश्लेषण कर सकती है।
आपकी प्राइवेसी कितनी सुरक्षित?
यह खुलासा डिजिटल प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूज़र्स को हर ऐप की परमिशन ध्यान से पढ़नी चाहिए और गैर-जरूरी एक्सेस को तुरंत बंद करना चाहिए।
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कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
- ऐप इंस्टॉल करते समय सभी परमिशन ध्यान से पढ़ें
- अनावश्यक माइक्रोफोन और कैमरा एक्सेस बंद करें
- फोन की प्राइवेसी सेटिंग्स नियमित रूप से जांचें
- जिन ऐप्स का उपयोग नहीं करते, उन्हें हटा दें
डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही, आपकी निजी जिंदगी को सार्वजनिक बना सकती है।
