

OpenAI Cyber Security Model: साइबर हमलों के बढ़ते खतरे के बीच OpenAI ने साइबर सिक्योरिटी के लिए अपना नया AI मॉडल GPT-5.6-Cyber लॉन्च किया है। इसको लेकर कंपनी ने जानकारी दी है कि यह मॉडल सामान्य AI सिस्टम से अलग काम करता है। वहीं इसे खास तौर पर मुश्किल साइबर सिक्योरिटी टास्क के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल सॉफ्टवेयर में छिपी सुरक्षा कमजोरियों को खोजने, उनकी जांच करने और सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने में किया जा सकेगा।
लेकिन यह मॉडल हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं होगा। OpenAI के अनुसार, GPT-5.6-Cyber को चुनिंदा कंपनियों और भरोसेमंद साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों तक सीमित रखा जाएगा। इसका मकसद AI की ताकत का इस्तेमाल साइबर डिफेंस को मजबूत करने में करना है।
नए मॉडल को साइबर सिक्योरिटी रिसर्च के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर में संभावित कमजोरियों की पहचान करने, उनके असर का विश्लेषण करने और सुरक्षा खामियों की रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम कर सकता है। इस तरह के AI टूल सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए किसी सिस्टम की मैनुअल जांच में लगने वाला समय कम कर सकते हैं। खासकर बड़े और जटिल सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स में ऐसी तकनीक संभावित खतरों को जल्दी पहचानने में मददगार हो सकती है।
बता दें कि साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में Zero-Day Vulnerability ऐसी सुरक्षा खामी होती है जिसकी जानकारी पहले से सार्वजनिक या संबंधित डेवलपर के पास नहीं होती। ऐसी कमजोरियां गंभीर खतरा बन सकती हैं, क्योंकि उन्हें ठीक करने से पहले उनका दुरुपयोग किया जा सकता है। OpenAI का कहना है कि GPT-5.6-Cyber को ऐसी नई कमजोरियों की पहचान करने के लिए भी तैयार किया गया है। मॉडल ने एक ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट में सुरक्षा खामियां खोजीं और उनके संभावित प्रभाव का विश्लेषण किया।
इस मॉडल की क्षमता का एक बड़ा उदाहरण Google Chrome के V8 JavaScript इंजन से सामने आया। OpenAI के मुताबिक, GPT-5.6-Cyber ने V8 में दो ऐसी कमजोरियां खोजीं, जिनकी पहले जानकारी नहीं थी। OpenAI के रिसर्चर्स ने इन खामियों की जांच करने के बाद Google को जिम्मेदारी से इसकी जानकारी दी। Google ने संबंधित समस्या को ठीक किया और एक खामी को CVE-2026-15903 पहचान संख्या दी।
यह घटना दिखाती है कि AI भविष्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च का अहम हिस्सा बन सकता है। लेकिन ऐसे शक्तिशाली मॉडल का इस्तेमाल केवल अधिकृत और कानूनी सुरक्षा कार्यों के लिए किया जाना बेहद जरूरी है। सही हाथों में यह तकनीक साइबर हमलों से पहले कमजोरियों को पहचानकर डिजिटल सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।