Facebook पर कॉपी कंटेंट वालों की खैर नहीं, मेटा का बड़ा फैसला, अब असली क्रिएटर्स को मिलेगा पूरा हक
Meta New Tools: सोशल मीडिया पर नकली और कॉपी किए गए कंटेंट के बढ़ते चलन से निपटने के लिए आखिरकार एक अहम कदम उठाया गया है। Meta ने Facebook के लिए नए टूल्स जारी किए हैं।
- Written By: सिमरन सिंह
Facebook (Source. Freepik)
Facebook Copy Content Rule: सोशल मीडिया पर नकली और कॉपी किए गए कंटेंट के बढ़ते चलन से निपटने के लिए आखिरकार एक अहम कदम उठाया गया है। टेक कंपनी Meta ने अपने प्लेटफॉर्म Facebook के लिए नए टूल्स जारी किए हैं और अपनी कंटेंट गाइडलाइंस को अपडेट किया है। इसका मकसद प्लेटफॉर्म पर क्रिएटर्स द्वारा बनाए गए ओरिजिनल कंटेंट की सुरक्षा को और मज़बूत करना है।
कंपनी का कहना है कि इन नए फीचर्स की मदद से, क्रिएटर्स के लिए कंटेंट की चोरी या किसी और के नाम का गलत इस्तेमाल होने की घटनाओं की रिपोर्ट करना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो जाएगा। इसके अलावा, ये कदम प्लेटफॉर्म पर AI-जनरेटेड स्पैम और कॉपी किए गए कंटेंट की तेज़ी से बढ़ती मात्रा को रोकने में भी मदद करेंगे।
क्रिएटर्स के लिए आया नया रिपोर्टिंग डैशबोर्ड
Meta ने घोषणा की है कि Facebook पर क्रिएटर्स को अब एक सेंट्रलाइज़्ड रिपोर्टिंग डैशबोर्ड मिलेगा। इस डैशबोर्ड की मदद से, वे उस कंटेंट को तुरंत फ़्लैग कर पाएँगे जिसे कॉपी किया गया है या उनके नाम से पोस्ट किया गया है।
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इस अपडेट से पहले, क्रिएटर्स को हर एक पोस्ट के लिए अलग-अलग रिपोर्ट फ़ाइल करनी पड़ती थी, जिससे यह प्रक्रिया काफ़ी मुश्किल हो जाती थी। हालाँकि, अब एक ही जगह से कई शिकायतें फ़ाइल की जा सकती हैं। उम्मीद है कि इससे कॉपी किए गए कंटेंट के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ होगी और असली क्रिएटर्स को राहत मिलेगी।
ओरिजिनल कंटेंट की परिभाषा भी बदली
Meta ने Facebook की कंटेंट गाइडलाइंस को भी अपडेट किया है, ताकि यह साफ़ हो सके कि इस प्लेटफ़ॉर्म पर “ओरिजिनल कंटेंट” किसे माना जाएगा। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जो कंटेंट किसी क्रिएटर ने खुद फ़िल्माया या बनाया है, उसे साफ़ तौर पर ओरिजिनल माना जाएगा। इसके अलावा, ऐसे वीडियो या Reels जो पहले से मौजूद कंटेंट को रीमिक्स करते हैं जैसे कि उनमें नया एनालिसिस, कमेंट्री या एक्स्ट्रा जानकारी जोड़ना वे भी इस कैटेगरी में आ सकते हैं। इस बदलाव का मकसद क्रिएटर्स को बेहतर इंसेंटिव देना और सोशल मीडिया पर “कॉपी-पेस्ट” कंटेंट की समस्या को कम करना है।
AI जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक बनी बड़ी चुनौती
हालांकि Meta के ये नए टूल्स डुप्लीकेट या कॉपी किए गए कंटेंट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल वे AI-जनरेटेड डीपफेक्स का पूरी तरह से पता लगाने में असमर्थ हैं। इसका मतलब है कि अगर किसी क्रिएटर की पहचान या शक्ल का इस्तेमाल करके कोई डीपफेक वीडियो बनाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। Meta ने सोशल मीडिया पर नकली AI-जनरेटेड कंटेंट के बारे में बढ़ती शिकायतों के बाद ही इस संबंध में अपने उपायों को और सख्त करने का फैसला किया।
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Facebook Marketplace में भी आया नया AI फीचर
Meta ने Facebook Marketplace के लिए एक नया फ़ीचर भी लॉन्च किया है। इस फ़ीचर की मदद से, अब बिज़नेस और सेलर Meta AI का इस्तेमाल करके कस्टमर के सवालों का अपने-आप जवाब दे पाएँगे।
उदाहरण के लिए, अगर कोई खरीदार पूछता है, “क्या यह अभी भी उपलब्ध है?” तो Meta AI लिस्टिंग की जानकारी के आधार पर अपने-आप एक जवाब तैयार कर देगा। इसमें प्रोडक्ट की कीमत, उपलब्धता और पिकअप की जगह जैसी जानकारी शामिल हो सकती है। उम्मीद है कि इससे खरीदने और बेचने का प्रोसेस पहले से कहीं ज़्यादा आसान और तेज़ हो जाएगा।
