सोचते ही टाइप होगा टेक्स्ट, बिना हाथ लगाए चल जाएगा लैपटॉप, नई टोपी कर देगी कमाल
What is Neuralink: क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ सोचने भर से आपका लैपटॉप टाइप करने लगे या फोन अपने आप स्क्रॉल हो जाए? अब यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है।
- Written By: सिमरन सिंह
Neuralink (Source. Gemini)
Typing Via Thought: क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ सोचने भर से आपका लैपटॉप टाइप करने लगे या फोन अपने आप स्क्रॉल हो जाए? अब यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है। जहां एक ओर Elon Musk की Neuralink दिमाग में चिप लगाकर इस तकनीक को संभव बना रही है, वहीं अब कैलिफोर्निया का स्टार्टअप Sabi बिना सर्जरी के ऐसा ही कमाल करने की तैयारी में है।
नई Beanie: दिमाग पढ़ने वाली टोपी?
Sabi नाम की कंपनी एक खास तरह की Beanie बना रही है, जो आपके विचारों को सीधे टेक्स्ट में बदल सकती है। यानी अब कीबोर्ड पर टाइप करने की जरूरत नहीं होगी आप बस सोचेंगे और शब्द स्क्रीन पर अपने आप दिखाई देंगे।
इस स्टार्टअप को OpenAI के शुरुआती निवेशक विनोद खोसला का समर्थन मिला है। कंपनी के को-फाउंडर राहुल छाबड़ा, जो BITS पिलानी से ग्रेजुएट हैं, इस टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुंचाने पर काम कर रहे हैं।
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कैसे काम करती है ये तकनीक?
यह टोपी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक पर आधारित है, जो दिमाग और कंप्यूटर के बीच सीधा कनेक्शन बनाती है। Neuralink की तरह इसमें भी दिमाग के सिग्नल पढ़े जाते हैं, लेकिन बड़ा फर्क यह है कि इसमें सर्जरी की जरूरत नहीं होगी।
Sabi की Beanie में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (EEG) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें स्कैल्प पर लगे सेंसर दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते हैं और उसे डिजिटल सिग्नल में बदल देते हैं।
क्या हैं इसकी चुनौतियां?
हालांकि यह तकनीक बेहद एडवांस है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। चूंकि सेंसर स्किन और हड्डियों के बाहर होते हैं, इसलिए सिग्नल कमजोर हो सकते हैं। इससे डेटा की सटीकता पर असर पड़ सकता है।
क्या कर पाएंगे यूजर्स?
कंपनी का दावा है कि इस टोपी की मदद से यूजर्स अपने विचारों को टेक्स्ट में बदल सकेंगे। यानी डॉक्यूमेंट लिखने के लिए सिर्फ सोचना ही काफी होगा। शुरुआत में टाइपिंग स्पीड करीब 30 शब्द प्रति मिनट हो सकती है, जो आम टाइपिंग से थोड़ी धीमी है। लेकिन कंपनी का कहना है कि इस्तेमाल के साथ यह स्पीड बढ़ेगी।
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क्या बदल जाएगी टेक्नोलॉजी की दुनिया?
अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह न सिर्फ टेक्नोलॉजी बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को भी पूरी तरह बदल सकती है। खासकर दिव्यांग लोगों के लिए यह किसी क्रांति से कम नहीं होगी।
सपना नहीं, भविष्य की हकीकत
अब वो दिन दूर नहीं जब बिना हाथ लगाए सिर्फ सोचने से काम हो जाएंगे। Sabi की यह Beanie टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। Neuralink इसी तरह नाम बनाता रहेगा।
