भारत और यूनेस्को का साझा कदम: AI के ज़रिए होगा सामाजिक-आर्थिक बदलाव
सामाजिक और आर्थिक मुद्दों में AI की भूमिका को भारत अब वैश्विक मंच पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) भी शामिल है।
- Written By: सिमरन सिंह
AI को लेकर क्या करना चाहता है भारत। (सौ. Freepik)
सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के समाधान में AI की भूमिका को लेकर भारत अब वैश्विक मंच पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) भारत के साथ मिलकर तकनीकी नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को सामाजिक कल्याण से जोड़ने पर कार्य कर रहा है।
भारत बनेगा वैश्विक शिखर सम्मेलन का मेजबान
भारत अगले वर्ष की शुरुआत में AI प्रभाव पर वैश्विक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह सम्मेलन न सिर्फ तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि एआई के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों से निपटने के प्रभावी समाधान भी प्रस्तुत करेगा।
भारत एक ‘चमकता सितारा’
यूनेस्को के एआई नैतिकता विभाग के प्रमुख इराकली खोडेली ने एक बयान में कहा, “डिजिटल परिवर्तन, प्रौद्योगिकी नवाचार और सटीक नीति निर्माण के संदर्भ में भारत दुनिया के लिए एक चमकता सितारा बन चुका है। दुनियाभर की निगाहें भारत पर टिकी हैं, और वह इस दिशा में अग्रणी बनकर उभर रहा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नीति और तकनीकी क्षमताएं अगली पीढ़ी के लिए मिसाल बन सकती हैं।
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वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भागीदारी
यूनेस्को के अब तक 193 सदस्य देश हैं। संगठन ने एआई सुरक्षा और नैतिकता को लेकर 2023 में ब्रिटेन, 2024 में दक्षिण कोरिया और 2025 के लिए भारत में वैश्विक फोरम आयोजित किया है। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष फरवरी में पेरिस में एआई “एक्शन” पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।
भारत और यूनेस्को की इस साझेदारी से यह संकेत मिलता है कि एआई अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।
