Internet हो सकता है स्लो, देश के सभी लोगों के लिए अलर्ट, वीडियो कॉल और OTT पर पड़ेगा असर
Internet Slow India: भारत के इंटरनेट सिस्टम पर भी खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल, दुनिया भर का ज्यादातर इंटरनेट डाटा समुद्र के नीचे बिछे केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है, और इन केबल्स पर अब खतरा है।
- Written By: सिमरन सिंह
Interent Wire (Source. X)
Internet Problem In War: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध ने अब भारत के इंटरनेट सिस्टम पर भी खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल, दुनिया भर का ज्यादातर इंटरनेट डाटा समुद्र के नीचे बिछे केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है, और इन केबल्स पर अब संकट मंडरा रहा है।
समुद्र के नीचे केबल्स पर बढ़ा खतरा
भारत का अधिकतर इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं सबमरीन केबल्स से होकर गुजरता है। अगर ये केबल्स किसी भी वजह से क्षतिग्रस्त होते हैं, तो Internet पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, लेकिन इसकी स्पीड जरूर धीमी हो सकती है। कंपनियों को डाटा ट्रांसफर के लिए लंबे और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे इंटरनेट यूजर्स को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
पश्चिम एशिया पर भारत की बड़ी निर्भरता
भारत का करीब 60% इंटरनेट ट्रैफिक मुंबई के रास्ते यूरोप तक जाता है। यह रूट लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है, जहां इस समय युद्ध जैसे हालात हैं। वहीं बाकी 40% ट्रैफिक चेन्नई के जरिए सिंगापुर और प्रशांत महासागर की ओर जाता है। इसका मतलब है कि भारत का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र पर निर्भर है, जहां तनाव चरम पर है।
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क्या पूरी तरह बंद हो सकता है Internet?
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का नेटवर्क एक जाल की तरह काम करता है, जहां एक रास्ता बंद होने पर डाटा दूसरे रास्ते से भेजा जाता है। लेकिन अगर लाल सागर से गुजरने वाली 17 अहम केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो “ट्रैफिक जाम” जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे स्पीड काफी धीमी हो जाएगी।
Interent Wire Under Sea
95% इंटरनेट समुद्री केबल्स पर निर्भर
भारत की लगभग 95% इंटरनेट कनेक्टिविटी इन्हीं समुद्री केबल्स पर आधारित है। देश में 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 अंतरराष्ट्रीय केबल्स काम कर रही हैं, जो भारत को दुनिया से जोड़ती हैं।
कंपनियों और प्रोजेक्ट्स पर असर
इस संकट का असर सिर्फ मौजूदा इंटरनेट तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। Meta (Facebook) ने अपने “2Africa” केबल प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया है। वहीं Airtel और Tata Communications जैसी भारतीय कंपनियां भी चिंतित हैं, क्योंकि उनका ग्लोबल नेटवर्क इन्हीं केबल्स पर निर्भर है।
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यूजर्स को क्या नुकसान हो सकता है?
- इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है
- वीडियो कॉल में रुकावट आ सकती है
- ऐप्स खुलने में देरी हो सकती है
- बड़ी कंपनियों के डाटा ट्रांसफर पर असर पड़ सकता है
- केबल्स की मरम्मत युद्ध के कारण मुश्किल हो सकती है
क्या है समाधान?
भारत को अब नए समुद्री इंटरनेट रूट्स तलाशने होंगे, जो पश्चिम एशिया से न गुजरें। साथ ही, देश को केबल रिपेयर और टेक्नोलॉजी में भी आत्मनिर्भर बनना होगा। Airtel जैसी कंपनियां पहले ही वैकल्पिक रूट्स पर काम शुरू कर चुकी हैं, ताकि जोखिम कम किया जा सके।
