

Insurance Claim Complaint: अपनी लंबी जिंदगी में लोग मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा हेल्थ या टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम में इसलिए लगाते हैं ताकि अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी या परिवार पर आर्थिक संकट के समय मदद मिल सके। लेकिन परेशानी तब बढ़ जाती है जब जरूरत के वक्त इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम ही रिजेक्ट कर दे। ऐसे में कई लोग निराश होकर मेडिकल खर्च अपनी जेब से उठाने लगते हैं और अगली बार पॉलिसी रिन्यू न कराने का फैसला कर लेते हैं।
लेकिन क्लेम रिजेक्ट होना अंतिम फैसला नहीं होता है। ऐसे में अगर आपको लगता है कि आपका क्लेम जायज है और उसे गलत या अनुचित वजह से खारिज किया गया है तो आपके पास शिकायत और अपील के कई रास्ते होते हैं जो आपके इस मुश्किल समय में काम आ सकते है।
इस भी कारण से अगर आपका क्लेम रिजेक्ट होता है तो र-बार कस्टमर केयर से बात करने के बजाय सीधे कंपनी के Grievance Redressal Officer (GRO) से शिकायत करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसके लिए कंपनी की वेबसाइट पर GRO का ईमेल पता और शिकायत से जुड़ी जानकारी मिल सकती है।
वहीं शिकायत करते समय इस प्रक्रिया में अपना पॉलिसी नंबर, प्रपोजल नंबर और डेट ऑफ बर्थ जैसी जरूरी जानकारी शामिल करनी होती है। साथ ही प्रीमियम भुगतान की रसीदें, मेडिकल बिल, डिस्चार्ज समरी, रिजेक्शन लेटर और जरूरी स्क्रीनशॉट भी अटैच करना जरूरी होता है। वहीं इस शिकायत को दर्ज करने के बाद कंपनी को जवाब और कार्रवाई के लिए करीब 15 दिनों का समय लगता है।
बताया जाता है कि अगर किसी भी कारण से कंपनी से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता या शिकायत का समाधान नहीं होता तो मामला IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल तक ले जाया जा सकता है। यहां पिछली शिकायत और इंश्योरेंस कंपनी की ओर से जारी रिजेक्शन लेटर समेत संबंधित दस्तावेजों के साथ शिकायत एस्केलेट की जा सकती है। वहीं ग्राहक ऑनलाइन शिकायत के अलावा दिए गए विवरण के अनुसार 1800 4254 732 या 155255 पर कॉल करके तथा complaints@irdai.gov.in पर ईमेल के जरिए भी शिकायत दर्ज करा सकता है।
ग्राहकों की पूरी संतुष्टि के लिए अगर कंपनी और नियामकीय शिकायत प्रक्रिया के बाद भी विवाद का समाधान नहीं होता तो पात्र मामलों में बीमा लोकपाल के सामने शिकायत रखने का विकल्प भी मौजूद किया गया है। इसलिए कहा जाता है कि केवल क्लेम रिजेक्ट होने के कारण हार मानना जरूरी नहीं है। इसमें सबसे अहम बात यह है कि शिकायत करते समय सभी दस्तावेज संभालकर रखें और कंपनी से हुई बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। क्योंकि आपके दिए गई सही दस्तावेज और उचित प्रक्रिया आपके पक्ष को मजबूत करने के काम आते है।