Spyware Attacks (Source. Freepik)
Cloud Security Threats: भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग का वैश्विक केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। डेटा सेंटर सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है और सरकार ने बड़ी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए 20 साल तक टैक्स छूट की घोषणा की है। लेकिन सवाल यह है क्या इतनी तेज रफ्तार के साथ हमारी साइबर सुरक्षा भी मजबूत हो रही है? विशेषज्ञों की मानें तो इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार सुरक्षा तैयारियों से कहीं आगे निकल चुका है, जिससे नए डेटा सेंटर हैकर्स के लिए आसान और महंगे निशाने बन सकते हैं।
सरकार ने बड़े क्लाउड प्रोवाइडर और डेटा सेंटर कंपनियों को 20 साल की टैक्स छूट दी है, जिसे बाद में घरेलू कंपनियों तक भी बढ़ाया गया। इसका उद्देश्य भारत को AI और क्लाउड सेवाओं का प्रमुख हब बनाना है।
2025 तक इस क्षेत्र में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश हो चुका है। अनुमान है कि नई नीतियों के बाद करीब 200 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। Gartner के मुताबिक 2029 तक डेटा सेंटर क्षमता में 48 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। इतनी तेज वृद्धि ने भारत को टेक्नोलॉजी निवेश का बड़ा गंतव्य बना दिया है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की मौजूदा साइबर सुरक्षा नीति 2013 की है, जो आज के AI और क्लाउड युग के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाती। Palo Alto Networks के अधिकारियों के अनुसार, गलत कॉन्फिगरेशन वाले क्लाउड सिस्टम हमलावरों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया की 29 प्रतिशत साइबर घटनाएं अब क्लाउड सिस्टम से जुड़ी हैं। एक अभियान में हैकर्स ने 23 करोड़ से ज्यादा टारगेट स्कैन किए ताकि खुले डेटा और लॉगिन क्रेडेंशियल हासिल किए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज विस्तार के कारण सुरक्षा ऑडिट पीछे छूट रहे हैं और यही कमजोरी हमलावरों के लिए अवसर बन रही है।
खतरा केवल साइबर अपराधियों से नहीं, बल्कि स्टेट समर्थित हैकर समूहों से भी है। Gartner के अनुसार डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर अब रणनीतिक लक्ष्य बन चुके हैं। Kaspersky की रिपोर्ट बताती है कि 2025 की पहली छमाही में भारत में 2.18 लाख से ज्यादा स्पाईवेयर हमले रोके गए। जैसे-जैसे अधिक संस्थाएं अपने सिस्टम क्लाउड पर ला रही हैं, डेटा का केंद्रीकरण बढ़ रहा है और यही हमलावरों को आकर्षित करता है।
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रिसर्च के अनुसार 99 प्रतिशत संगठन AI आधारित कोडिंग से सिस्टम तैयार कर रहे हैं, लेकिन केवल 18 प्रतिशत उतनी तेजी से कमजोरियां दूर कर पाते हैं। इसके अलावा “शैडो डेटा” भी बड़ा खतरा है टेस्टिंग या टूल बदलने के दौरान बनी अस्थायी कॉपी, जो अक्सर अनमॉनिटर रह जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 40 प्रतिशत क्लाउड ब्रीच ऐसे ही अनदेखे स्टोरेज से होते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि डेटा सेंटर को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मानकर सख्त सुरक्षा मानक लागू करना बेहद जरूरी है, वरना डिजिटल विकास की यह दौड़ महंगी साबित हो सकती है।