Deepfake पर सरकार का सबसे बड़ा डिजिटल एक्शन, अब सिर्फ 3 घंटे में हटाना होगा फेक कंटेंट
Deepfake: AI के दौर में डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो और AI से तैयार किए गए भ्रामक कंटेंट तेजी से चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार ने इन खतरों से निपटने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है।
- Written By: सिमरन सिंह
Deepfake (Source. Gemini)
IIT Deepfake Detection: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दौर में डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो और AI से तैयार किए गए भ्रामक कंटेंट तेजी से चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार ने इन खतरों से निपटने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि सरकार ने 13 हाई-टेक AI प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है और सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए फेक कंटेंट हटाने की समय-सीमा घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दी है।
बता दें कि केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। जिसमें इसका उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
IIT तैयार करेंगे Deepfake पकड़ने वाले स्मार्ट AI टूल
जानकारी में सामने आया है कि सरकार के Safe & Trusted AI Program और IndiaAI Mission के तहत देश के प्रमुख IIT सहित कई संस्थानों में 13 रिस्पॉन्सिबल AI प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है। इनमें IIT जोधपुर और IIT मद्रास मिलकर Saakshya नाम का मल्टी-एजेंट Deepfake Detection Framework विकसित कर रहे हैं। वहीं AI Vishleshak ऑडियो और वीडियो में हुई छेड़छाड़ की तुरंत पहचान करने वाला है। इसके अलावा IIT खड़गपुर रियल-टाइम Voice Deepfake Detector तैयार कर रहा है नकली आवाजों को पहचानने में सक्षम होगा।
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AI कंटेंट के लिए सख्त नियम
इसके साथ ही सरकार ने 10 फरवरी 2026 को AI-जनरेटेड कंटेंट से जुड़े नियमों को और सख्त किया था। वहीं नए नियमों के तहत Facebook, Instagram, YouTube, X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गैर-कानूनी AI कंटेंट की पहचान कर 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। साथ ही AI से बने वैध कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल और ट्रेसेबल मेटाडेटा देना जरूरी होगा ताकि यूजर्स असली और नकली कंटेंट में अंतर समझ सकें। यदि कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा भी खोनी पड़ सकती है।
AI से सुरक्षित होगी भारत की सांस्कृतिक विरासत भी
इतना ही नहीं सरकार केवल Deepfake रोकने पर ही नहीं बल्कि AI के सकारात्मक इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। बता दें कि Gyan Bharatam वेब पोर्टल के जरिए भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। इस पोर्टल पर मौजूद Gyan Mitram AI इंटरफेस पुरानी पांडुलिपियों को समझने में मदद करेगा जबकि BharatiyaGPT की सहायता से लोग अपनी भाषा में इन दस्तावेजों की जानकारी पढ़ या समझ सकेंगे।
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साइबर सुरक्षा और जागरूकता पर भी फोकस
देखा तो यह भी जा रहा है कि सरकार के ISEA (Information Security Education and Awareness) कार्यक्रम के तहत अब तक 6,650 से अधिक वर्कशॉप आयोजित की जा चुकी हैं जिनमें 11.37 लाख से ज्यादा लोगों को साइबर सुरक्षा और AI से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया गया है। वहीं CERT-In भी लगातार Deepfake और AI आधारित साइबर खतरों से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी कर रहा है। इन सभी कदमों को लेकर सरकार का मानना है कि AI का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग ही भविष्य के डिजिटल भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
