

News Website Traffic Drop: Google Core Update को लेकर SEO की दुनिया में एक बार फिर चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं की कई न्यूज वेबसाइट्स के संचालकों ने हाल के दिनों में ट्रैफिक घटने की बात कही है। वहीं कुछ वेबसाइट्स का कहना यह भी है कि महज दो-तीन दिनों में ट्रैफिक में 20% तक की गिरावट दर्ज कि गई है। लेकिन इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और Google ने इस गिरावट को किसी नए अपडेट से नहीं जोड़ा है।
इसी बीच SEO विशेषज्ञ डैन टेलर ने अपने प्रेडिक्शन मॉडल के आधार पर अनुमान लगाया है कि अगले 30 दिनों में Google का कोई अपडेट आने की संभावना 96.8% है। साथ ही उन्होंने संभावित बदलाव की तुलना 2011 के Panda Update से की है। यह उनका निजी आकलन है Google की आधिकारिक घोषणा नहीं।
न्यूज़ 18 लैंग्वेजेज़ के लिए ओरिजिनल वीडियो के संपादक मनोज खांडेक ने इस बात पर रोशनी डालते हुए अपने Linkedin पर लिखते हुए उन्होंने आने वाले समय में होने वाले बदलावों के बारे में बताया है।
इस जानकारी में Google के फरवरी 2011 में Panda Update पेश करने को लेकर चर्चा हुई है। जिसका उद्देश्य सर्च रिजल्ट में कम गुणवत्ता और कम मौलिकता वाले कंटेंट की मौजूदगी को कम करना था। उस समय कई वेबसाइट्स बड़ी संख्या में ऐसे लेख प्रकाशित करती थीं जिनमें पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी कम होती थी या दूसरी जगहों से ली गई सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था।
बता दें क Panda ने वेबसाइट्स की कंटेंट क्वालिटी को लेकर डिजिटल पब्लिशिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव किया है। इसका असर उन वेबसाइट्स पर पड़ा जिनकी सर्च विजिबिलिटी कमजोर कंटेंट पर निर्भर थी।
वहीं बाद में Panda को 2015 में Google के मुख्य रैंकिंग सिस्टम का हिस्सा बना दिया गया। जिसमें Penguin जो मुख्य रूप से लिंक स्पैम से निपटने के लिए था 2016 में मुख्य सिस्टम में शामिल हुआ। वहीं Hummingbird ने 2013 में सर्च को यूजर के सवाल का अर्थ और संदर्भ बेहतर ढंग से समझने की दिशा में आगे बढ़ाया था।
डैन टेलर के अनुमान बताते है कि अगला बड़ा बदलाव कम गुणवत्ता वाले और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए AI कंटेंट पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। लेकिन Google ने अभी किसी Panda जैसे नए अपडेट की पुष्टि नहीं की है। इसलिए ट्रैफिक में गिरावट को सीधे किसी आगामी अपडेट का संकेत मानना जल्दबाजी हो सकती है।
वहीं Google का इसको लेकर कहना है कि उसके कोर अपडेट का उद्देश्य सर्च रिजल्ट में उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी को बेहतर तरीके से सामने लाना है। ऐसे अपडेट किसी एक वेबसाइट को निशाना बनाने के बजाय व्यापक रैंकिंग सिस्टम में बदलाव करते हैं।
आज के समय में न्यूज वेबसाइट्स के सामने चुनौती सिर्फ Google की रैंकिंग तक सीमित नहीं है। इसमें AI Overviews और AI Mode जैसे फीचर्स सर्च पेज पर ही सवालों के जवाब उपलब्ध करा सकते हैं। ऐसे में कुछ यूजर्स को पूरी जानकारी के लिए वेबसाइट पर क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती।
लेकिन Google का कहना है कि उसकी सर्च सेवाएं अब भी वेबसाइट्स को बड़ी संख्या में क्लिक भेजती हैं। जिसको लेकर कंपनी का कहना है कि यूजर्स मौलिक विश्लेषण, वास्तविक अनुभव और गहराई से दी गई जानकारी में भी रुचि रखते हैं। जिसका सीधा मतलब है कि अच्छी रैंकिंग के बावजूद हर वेबसाइट को पहले जितना ट्रैफिक मिले यह जरूरी नहीं। यूजर्स के सर्च करने का तरीका और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी ट्रैफिक को प्रभावित कर सकते हैं।
सलाह दी जाती है कि अगर किसी वेबसाइट का ट्रैफिक अचानक गिरा है तो सबसे पहले Google Search Console में क्लिक, इंप्रेशन, औसत रैंकिंग और प्रभावित पेजों का डेटा देखना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि गिरावट Google Search में हुई है या Discover से आने वाले ट्रैफिक में।
साथ ही पब्लिशर्स को कंटेंट की मौलिकता, तथ्यात्मक सटीकता, रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और पाठकों के लिए उसकी उपयोगिता पर ध्यान देना चाहिए। केवल अधिक लेख प्रकाशित करना या AI से बड़ी संख्या में कंटेंट तैयार करना लंबे समय की रणनीति नहीं हो सकती।
ऐसे में अगला Google Core Update कब आएगा यह अभी निश्चित नहीं है। लेकिन AI के दौर में न्यूज वेबसाइट्स के लिए असली चुनौती सिर्फ सर्च रैंकिंग बचाना नहीं बल्कि पाठकों को अपनी वेबसाइट पर आने की ठोस वजह देना भी बनता जा रहा है।