Explainer: क्या सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में Starlink को मात दें पाएंगे अंबानी और मित्तल?
सैटेलाइट इंटरनेट पर भारत में कब्जा करने के लिए मस्क, अंबानी और मित्तल आमने-सामने आ गए हैं। सैटेलाइट इंटरनेट की लड़ाई में कौन-किस पर हाबी दिख रहा है, इसके लिए पढ़ते जाएं इस लेख को अंत तक।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
मस्क-अंबानी-मित्तल (डिजाइन फोटो)
नवभारत टेक डेस्क : टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हर रोज कुछ नया इनवेंट हो रहा है। अगर बात हम टेलीकॉम सेक्टर की करें तो इसमें बहुत सारे नए-नए इनोवेशन हुए हैं। मौजूदा समय में हम अपने फोन, लैपटॉप या पीसी में जो इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, उसे टेरेस्ट्रियल इंटरनेट नेटवर्क कहा जाता है। लेकिन, अब हम इससे एक स्पेट आगे की ओर बढ़ चुके हैं। एलन मस्क पीछले कई महीनो से स्टारलिंक प्रोजेक्ट पर काम कर रहें हैं। बता दें, यह एक सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क है, जिसके जरिए दुनिया के किसी जगह से अप बिना सिम कार्ड के सुपरफास्ट इंटरनेट चला पाएंगे।
Starlink को टक्कर देने के लिए अंबानी और मित्तल हैं तैयार
ऐसे में एलन मस्क के स्टार लिंक प्रोजेक्ट को देखते हुए भारत के दो बड़े टेलिकॉम दिग्गज कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज को प्रोवाइड करने के लिए आमने सामने आ गए हैं। हम बात कर रहे हैं जियो के चेयरमैन मुकेश अंबानी और एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल की। तो अब सवाल यह है कि क्या ये दोनों दिग्गज कंपनी एलन मस्क के स्टर लिंक को मात दे पाएगी?
मुकेश अंबानी और सुनील मित्तल दोनों ही भारत के सैटेलाइट मार्केट पर कब्जा करना चाहते हैं। लेकिन यह लड़ाई इतनी आसान है नहीं, क्योंकि इस रेस में स्टारलिंक अभी तक इसमें काफी आगे नजर आती दिख रही है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि स्टारलिंक की तरफ से इस तकनीक पर लंबे समय से काम शुरू किया जा चुका है। जबकि जियो और एयरटेल अभी एस रेस में थोड़ी पीछे है।
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अगर बात जियो की करें तो जियो जब अपनी 4जी सर्विसेज शुरू की थी तो उस समय डेटा, कॉलिंग और एसएमएस को फ्री कर दिया था, जिसके कारण कई सारे टेलाकॉम कंपनी इस रेस से बाहर हो गए। मतलब, जियो के पास फायदा है कि वह भारतीय मार्केट को बहुत पहले से पहचानता है। हालांकि सभी अपने-अपने तरीके से इस पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए JIO को लाइसेंस प्राप्त
इस बीच भारत सरकार की ओर से प्रशासनिक रूट का रास्त अपनाया गया है। इंटरनेट सैटेलाइट ब्रॉडबैंड हासिल करने के लिए इन अरबपतियों को फिलहाल इसी रास्ते से गुरना होगा। सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में जियो को भारत में लाइसेंस प्राप्त हो गया है, जबकि स्टारलिंक और एयरटेल लाइसेंस के लिए अभी इंतजार कर रही है। प्लेइंग फील्ड की जगह जियो चाहता है कि सरकार को नीलामी का रास्ता अपनाना चाहिए। यानी जिस कंपनी को स्पेक्ट्रम चाहिए, वह नीलामी का हिस्सा बने। जबकि एलन मस्क नीलामी के रास्ते के सख्त खिलाफ नजर आते दिख रहे हैं।
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