Elon Musk का बयान: घटती आबादी पर फिर छिड़ी बहस

Tesla CEO Elon Musk सोशल मीडिया पोस्ट्स की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। हालिया प्रतिक्रिया ने कम होती आबादी के मुद्दे पर वैश्विक बहस को जन्म दे दिया है।
Elon Musk का बयान: घटती आबादी पर फिर छिड़ी बहस
Elon Musk की पोस्ट े बवाल। (सौ. x)
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Elon Musk X Post: Tesla के CEO Elon Musk अक्सर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। अब एक बार फिर उनकी हालिया प्रतिक्रिया ने कम होती आबादी के मुद्दे पर वैश्विक बहस को जन्म दे दिया है। दरअसल, मस्क ने एक पाकिस्तानी व्यक्ति के विवादित बयान पर प्रतिक्रिया दी है। मस्क पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका मानना है, दुनिया की सभ्यता के लिए घटती जनसंख्या बढ़ती आबादी से कहीं ज्यादा खतरनाक है।

पाकिस्तानी व्यक्ति के बयान पर मस्क की प्रतिक्रिया

मस्क ने हाल ही में X (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो रही एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। इस पोस्ट में एक पाकिस्तानी शख्स डेनमार्क के निवासी से बहस करता दिख रहा था। वीडियो में वह कहते हुए नजर आता है "हम पूरी जिंदगी तुम्हारी छाती पर बैठे रहेंगे। हमारे 5 बच्चे हैं, तुम्हारे एक या दो। अगले 10-15 सालों में इस देश में स्थानीय लोगों से ज्यादा पाकिस्तानी लोग होंगे।" पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई इस बहस के दौरान उस शख्स ने अन्य देशों के उदाहरण भी दिए, जहां प्रवासी आबादी ने संख्या में तेजी से बढ़त बनाई है।

मस्क का जवाब

Elon Musk ने इस वीडियो को रिपोस्ट करते हुए लिखा "उसका गणित ठीक है।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। इससे पहले भी मस्क ने कई इंटरव्यू और पोस्ट्स के जरिए चेतावनी दी थी कि जनसंख्या में लगातार आ रही गिरावट भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है।

पहले भी जता चुके हैं चिंता

मस्क ने कुछ समय पहले दिए एक इंटरव्यू में कहा था "ज्यादातर लोग सोचते हैं कि दुनिया में आबादी बहुत ज्यादा है, लेकिन हकीकत में इसका उल्टा सच है।"उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जन्म दर में गिरावट जारी रही, तो आने वाले समय में कई देशों की अर्थव्यवस्था और सभ्यता दोनों प्रभावित होंगी।

किन देशों पर है सबसे ज्यादा असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, जापान, दक्षिण कोरिया, इटली और पूर्वी यूरोप के कई देशों में जनसंख्या तेज़ी से घट रही है। यहां जन्म दर लगातार कम हो रही है, जिससे आने वाले दशकों में इन देशों के सामने गंभीर जनसांख्यिकीय संकट खड़ा हो सकता है।

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