

Deep Seek, China AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आने वाला बदलावों का एक नया दौर आ गया है। जैसा की सभी को ता था कि अब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा माना जाता था लेकिन ताजा आंकड़े सामने आने के बाद कहानी पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। बता दें कि ग्लोबल AI एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म OpenRouter की रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल्स की सूची में चीनी कंपनियों ने बड़ा स्थान हासिल किया है। वहीं इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के चर्चित AI मॉडल्स जैसे OpenAI के GPT 5.5 और Google के Gemini टॉप 10 से बाहर हो चके है।
OpenRouter ने जो जानकारी साझा कि है उसके अनुसार DeepSeek का DeepSeek V4 इस समय 4.63 ट्रिलियन टोकन उपयोग के साथ दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला AI मॉडल बन गया है। वहीं दूसरे स्थान पर चीन का MiniMax M3 जो 4.13 ट्रिलियन टोकन के साथ है और तीसरे नंबर पर Xiaomi का MiMo मॉडल है जिसने 3.8 ट्रिलियन टोकन का आंकड़ा छू लिया है। जिसका सीधा मतलब है कि दुनिया के टॉप 3 AI मॉडल्स पर पूरी तरह चीन का कब्जा हो चुका है। इसके अलावा Tencent के AI मॉडल्स भी शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफलता हासिल कर ली हैं।
AI की दुनिया में टोकन शब्द के बारे में बताए तो यह एक महत्वपूर्ण मापदंड के रूप में देखा जाता है। इसमें जब कोई यूजर AI से सवाल पूछता है, कंटेंट लिखवाता है या कोडिंग करवाता है तो AI उस जानकारी को टोकन के रूप में प्रोसेस करने लगता है। वहीं इसमें जिस AI मॉडल के टोकन उपयोग की संख्या ज्यादा होती है उसको दुनियाभर के डेवलपर्स, कंपनियां और यूजर्स के बीच सबसे ज्यादा भरोसा मॉडल को तौर पर देखा जाता हैं। वहीं इसपर बात करते हुए OpenRouter ने बताया है कि 15 जून को समाप्त सप्ताह में कुल 47.1 ट्रिलियन टोकन का उपयोग किया गया था जो पिछले सप्ताह के 44.6 ट्रिलियन टोकन से ज्यादा है।
रिपोर्ट्स में जो जानकारी सामने आई है उसमें बताया गया है कि चीन की सफलता के पीछे कम ऊर्जा लागत और सस्ती AI सेवाएं बड़ी वजह हैं। जिसमें चीनी AI कंपनियां अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम कीमत पर टोकन उपलब्ध करा रही हैं। यही कारण है कि कई बड़ी कंपनियां अब महंगे अमेरिकी AI टूल्स की जगह किफायती चीनी मॉडल्स की ओर जाने लगी है।
वहीं विश्लेषकों का मानना है कि AI बाजार में यह बदलाव आने वाले सालो में वैश्विक टेक्नोलॉजी संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इतना ही नही Goldman Sachs का अनुमान है कि 2030 तक AI टोकन का उपयोग 24 गुना तक बढ़ जाएगा जिससे चिप्स की मांग और सप्लाई पर दबाव देखने को मिलेगा।