भारत में गूगल की मोनोपॉली पर CCI की बड़ी कार्रवाई, अब स्मार्ट टीवी पर नहीं चलेगा दबाव
भारत की प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने गूगल पर "अपने प्रमुख स्थान का दुरुपयोग" करने का स्पष्ट आरोप लगाया है। आयोग ने कहा है कि गूगल ने अपने नियमों का अनुचित लाभ उठाकर प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर करने की कोशिश की है।
- Written By: सिमरन सिंह
Google TV में क्या आ रही है परेशानी। (सौ. X)
नवभारत टेक डेस्क: गूगल इन दिनों वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा विरोधी (एंटीट्रस्ट) मामलों से घिरा हुआ है। भारत में भी गूगल के खिलाफ एक बड़ा मामला दर्ज किया गया था, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भारत की प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने गूगल पर “अपने प्रमुख स्थान का दुरुपयोग” करने का स्पष्ट आरोप लगाया है। आयोग ने कहा है कि गूगल ने अपने नियमों का अनुचित लाभ उठाकर प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर करने की कोशिश की है।
एंड्रॉयड टीवी निर्माताओं को मिली बड़ी राहत
CCI के इस फैसले के बाद अब भारत में एंड्रॉयड टीवी निर्माता कंपनियों को गूगल का ऑपरेटिंग सिस्टम, गूगल प्ले स्टोर और अन्य एप्लिकेशंस को अनिवार्य रूप से अपने टीवी में इंस्टॉल करना जरूरी नहीं होगा। यानी अब वे बिना गूगल ऐप्स के भी स्मार्ट टीवी बेच सकेंगे।
गूगल का ‘न्यू इंडिया एग्रीमेंट’ और सेटलमेंट एप्लिकेशन
गूगल ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 48A के अंतर्गत CCI के सामने सेटलमेंट एप्लिकेशन पेश किया है, जिसे “न्यू इंडिया एग्रीमेंट” कहा गया है। इसके तहत गूगल अब भारत में एंड्रॉयड टीवी के लिए गूगल प्ले स्टोर और प्ले सर्विसेज को अलग-अलग लाइसेंस के रूप में देगा।
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गूगल का आधिकारिक बयान
“Google हर उस देश में लागू स्थानीय कानूनों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है जहां हम काम करते हैं। हमारे मामले को प्रस्तुत करने और संलग्न करने के अवसर के लिए CCI के आभारी हैं। हम CCI को ऐसी प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए भी धन्यवाद देते हैं जो कंपनियों और बाजार के बीच रचनात्मक जुड़ाव को सक्षम बनाती हैं, जिससे निरंतर निवेश और विकास संभव होता है।”
20.2 करोड़ रुपये का जुर्माना
गूगल पर इस मामले में ₹20.2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 15% की छूट सेटलमेंट के तहत दी गई है। यह शिकायत अधिवक्ता क्षितिज आर्य और पुरुषोत्तम आनंद द्वारा प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 19(1)(a) के तहत दर्ज की गई थी।
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अमेरिका में भी गूगल पर शिकंजा
सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका में भी गूगल को डिजिटल विज्ञापन बाजार में अवैध मोनोपॉली बनाए रखने का दोषी पाया गया है। अमेरिकी अदालत ने कहा कि गूगल ने जानबूझकर पब्लिशर एड सर्वर और एड एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म पर एकाधिकार स्थापित किया, जिससे समाचार संस्थानों और डिजिटल क्रिएटर्स की कमाई प्रभावित हुई।
