

AI mRNA Cancer Vaccine: कैंसर के इलाज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और mRNA टेक्नोलॉजी के मेल ने नई उम्मीद जगाई है। बता दें कि अमेरिकी बायोटेक कंपनियों Moderna और Merck की ओर से विकसित की गई पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन को लेकर शुरुआती रिपोर्ट्स ने मेडिकल जगत का ध्यान खींचा है। वहीं इसको लेकर खास बात यह है कि यह वैक्सीन हर मरीज के कैंसर की जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर तैयार की जाती है। लेकिन इसे लेकर सामने आए दावों को समझते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नई कैंसर थेरेपी को व्यापक इस्तेमाल तक पहुंचने के लिए नियामकीय मंजूरी और लंबे समय के अध्ययन जरूरी होते हैं।
पारंपरिक कीमोथेरेपी पूरे शरीर में तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है। इसके मुकाबले पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन का उद्देश्य मरीज के ट्यूमर में मौजूद खास म्यूटेशन को पहचानकर इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ तैयार करना है। इसके लिए सबसे पहले सर्जरी के बाद ट्यूमर का सैंपल लेकर उसकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग की जाती है। इसके बाद AI ट्यूमर में मौजूद बड़ी संख्या में म्यूटेशन का विश्लेषण कर ऐसे म्यूटेशन चुनता है जिन्हें इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से पहचान सकता है।
चुने गए म्यूटेशन के आधार पर ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर mRNA वैक्सीन के लिए जरूरी निर्देश तैयार करता है। वैक्सीन शरीर में पहुंचने के बाद इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं के खास संकेत पहचानने के लिए प्रशिक्षित करने का काम करती है। आसान भाषा में कहें तो यह इलाज शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर के खिलाफ ज्यादा सटीक तरीके से सक्रिय करने की कोशिश करता है।
वहीं इस तकनीक का परीक्षण सर्जरी करा चुके हाई-रिस्क मेलानोमा मरीजों में किया गया है। Moderna और Merck की वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda के साथ इस्तेमाल करने पर कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को कम करने के संकेत मिले हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे कैंसर के पर्सनलाइज्ड इलाज की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।
इस तकनीक को लेकर एलन मस्क ने कहा है, "आर्टिफिशियल आरएनए तकनीक के कारण अब बीमारियों को ठीक करना एक तरह से सॉफ्टवेयर की समस्या बन गया है।" उनका मानना है कि mRNA तकनीक का भविष्य बेहद व्यापक हो सकता है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस खोज को मेडिकल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि AI और mRNA कैंसर को पूरी तरह खत्म कर देंगे। लेकिन अगर आगे के ट्रायल और नियामकीय प्रक्रियाएं सकारात्मक रहती हैं तो भविष्य में कैंसर का इलाज मरीज की बीमारी के हिसाब से डिजाइन किए जाने की दिशा में तेजी से बढ़ सकता है।