

Apple Watch Listening: Apple Watch को आमतौर पर फिटनेस, हेल्थ मॉनिटरिंग और कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन स्मार्टवॉच में तेजी से जुड़ रहे नए AI और ऑडियो फीचर्स अब प्राइवेसी को लेकर बहस भी बढ़ा रहे हैं। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की Deakin University में कम्युनिकेशन के सीनियर लेक्चरर ल्यूक हीम्सबर्गेन ने The Conversation में लिखे एक लेख में सवाल उठाया है कि अगर स्मार्ट डिवाइस आसपास की बातचीत को समझ सकता है तो कमरे में मौजूद दूसरे लोगों की सहमति का क्या होगा?
ल्यूक हीम्सबर्गेन ने इसको लेकर कहा है कि कुछ नए फीचर्स बातचीत के हिस्सों को टेक्स्ट में बदलने या उनका सारांश तैयार करने में सक्षम हैं। वहीं Apple का कहना है कि ऑडियो को रिकॉर्ड या स्टोर नहीं किया जाता आवाज को किसी खास व्यक्ति से नहीं जोड़ा जाता और डेटा एन्क्रिप्टेड रहता है। ऐसे में विवाद का केंद्र सिर्फ यह नहीं है कि डेटा सुरक्षित है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि किसी निजी बातचीत को डिवाइस द्वारा समझे जाने की अनुमति किसके पास होनी चाहिए?
देखा जाता है कि जब लोग घर, ऑफिस, कैफे या किसी मीटिंग में बातचीत करते हैं तो आमतौर पर उनकी उम्मीद होती है कि बात वहीं मौजूद लोगों तक सीमित रहे। सूचना वैज्ञानिक हेलेन निसेनबाम के कॉन्टेक्स्चुअल इंटीग्रिटी सिद्धांत का कहना है कि निजी जानकारी का इस्तेमाल उस संदर्भ और नियमों के मुताबिक होना चाहिए जिसमें वह साझा की गई है। यहीं स्मार्ट डिवाइस नई चुनौती पैदा करते हैं। बातचीत टेक्स्ट, ट्रांसक्रिप्शन या डिजिटल समरी का हिस्सा बन सकती है भले ही उसमें मौजूद हर व्यक्ति ने इसके लिए सहमति न दी हो।
ल्यूक का इसको लेकर बताना है कि अगर कोई फीचर Opt-in है तो उसे सक्रिय करने का फैसला Apple Watch पहनने वाला व्यक्ति करता है। लेकिन आसपास बैठे दूसरे लोगों के पास ऐसा विकल्प नहीं होता। उदाहरण के तौर पर Live Rewind पिछली 15 सेकंड की बातचीत को ट्रांसक्राइब कर सकता है। वहीं Siri Recap पूरे दिन बैकग्राउंड में काम कर बातचीत का सारांश तैयार कर सकता है। लेख में सवाल उठाया गया है कि हर बार स्पष्ट संकेत न मिलने पर आसपास मौजूद लोगों को कैसे पता चलेगा कि उनकी बातचीत डिवाइस समझ रहा है या नहीं।
यह चिंता सिर्फ Apple Watch तक सीमित नहीं है। प्राइवेसी को लेकर स्मार्ट ग्लास और दूसरे लगातार सुनने या देखने वाले डिवाइस भी चर्चा में रहे हैं। वहीं Apple ने 2025 में Siri से जुड़े एक मामले में 95 मिलियन डॉलर के सेटलमेंट पर सहमति जताई थी। मुकदमे में आरोप था कि Siri गलती से एक्टिवेट होकर निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सकती थी। Apple ने गलत काम करने की बात स्वीकार नहीं की थी और अपनी प्राइवेसी नीतियों पर जोर दिया था।