

ANNAM AI Platform: किसानों के लिए हमेशा से खेती करते समय मौसम का बदलना, अनिश्चित बारिश और कीटों का हमला बड़ी चुनौती रहे हैं। जिसको देखते हुए इन कामों के लिए अलग-अलग मोबाइल ऐप भी आ गए है। ऐशे में इस तरह की सभी समस्या का समाधान करने के लिए IIT रोपड़ एक ऐसा AI प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो मौसम, मिट्टी, फसल और कीटों से जुड़ी जानकारी को एक जगह जोड़कर किसानों को आसान भाषा में सलाह देने का काम करेंगा। वहीं इसका नाम ANNAM.AI है और इसका लक्ष्य खेती को अनुमान के बजाय डेटा आधारित बनाना है।
ANNAM.AI के बारे में बताए तो यह भारत सरकार के सहयोग से IIT रोपड़ में विकसित किया जा रहा AI केंद्र है। जिसके प्रोजेक्ट डायरेक्टर और CAPS के डीन डॉक्टर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया है कि इस AI का उद्देश्य तकनीक, डेटा और कृषि विशेषज्ञता को एक साथ लाकर स्मार्ट कृषि सिस्टम तैयार करना है। वहीं यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से तीन हिस्सों पर काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है जिसमें SWAN Weather Station, Krishi AI और ACE Chatbot शामिल होगे। वहीं खेतों में लगे स्मार्ट वेदर स्टेशन तापमान, बारिश, हवा और नमी का स्थानीय स्तर पर डेटा जुटाते हैं। इसके बाद Krishi AI इस जानकारी का विश्लेषण करते हुए काम करेंगा
Krishi AI की खासियत है कि वो ANNAM.AI का अहम हिस्सा बना हुआ है। जो अलग-अलग स्रोतों से मिले डेटा को Sensor Fusion तकनीक के जरिए जोड़कर किसानों के लिए सलाह तैयार करता है। वहीं सिस्टम करीब 1 से 5 किलोमीटर के दायरे में मौसम से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण भी कर सकता है। इसको लेकर खास बात यह है कि AI को 50 लाख से ज्यादा तस्वीरों के आधार पर फसलों में होने वाली बीमारियों और कीटों की पहचान के लिए तैयार किया गया है। जिससे सैटेलाइट इमेज, खेत के वेदर स्टेशन और अन्य डेटा को मिलाकर फसल की स्थिति का आकलन निकाला जाता है।
ANNAM.AI में यह खासियत भी है कि इसके SWAN वेदर स्टेशनों में स्मार्ट AI चिप का इस्तेमाल किया गया है। जिससे इंटरनेट कनेक्शन कमजोर होने पर भी डिवाइस स्थानीय स्तर पर मौसम का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। वहीं ACE मतलब ANNAM Chat Engine किसानों को हिंदी, पंजाबी, मराठी, तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भाषाओं में कृषि सलाह देने के लिए तैयार किया गया है। जिसमें किसान अपनी भाषा में सवाल पूछकर जवाब पा सकते है।
इस तकनीक में देखा जा रहा है कि AI सिस्टम सिर्फ वर्तमान मौसम की जानकारी देने तक सीमित नहीं होने वाला है। इसमें मशीन लर्निंग की मदद से यह 3 से 7 दिन पहले अत्यधिक गर्मी या संभावित कीट हमले जैसे जोखिमों का अलर्ट देने में सक्षम होने का लक्ष्य रखता है। इससे किसान सिंचाई, खाद और फसल सुरक्षा की तैयारी समय रहते कर सकते हैं। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो खेती में डेटा और AI के इस्तेमाल को नई दिशा मिल सकती है।