AI बना युद्ध का नया हथियार, 96 घंटे में 2,000 ठिकानों पर हमले, अमेरिका-ईरान संघर्ष से दुनिया चौंकी
AI In War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिला है। देखा जा रहा है कि इस युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और महंगाई बढ़ती जा रही है।
- Written By: सिमरन सिंह
America Iran Conflict (Source. gemini)
America Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर मध्य पूर्व में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर देखने को मिला है। देखा जा रहा है कि इस युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और महंगाई बढ़ती जा रही है। लेकिन अब देखा जा रहा है कि इस लड़ाई में सबसे बड़ी चर्चा किसी मिसाइल या लड़ाकू विमान की नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की हो रही है। जिसको पढ़ने के बाद यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य के युद्धों का असली सेनापति AI बन जाएगा?
ग्रोक AI ने बदल दिया युद्ध का तरीका
जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अदालत में स्वीकार किया है कि ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok का इस्तेमाल किया गया था। इसमें सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि इस तकनीक ने अमेरिकी सेना को सिर्फ 96 घंटों के भीतर 2,000 अलग-अलग ठिकानों पर बेहद सटीक मिसाइल हमले करने में मदद की। वहीं जब से यह बात सामने आई है तब से ही सैन्य रणनीति की दुनिया में हलचल मचा दी है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि AI अब केवल चैटिंग, फोटो एडिटिंग या वीडियो बनाने का टूल नहीं रहा बल्कि यह युद्ध की दिशा और परिणाम तय करने में भी मदद कर रहा है।
ड्रोन स्वॉर्म और स्मार्ट हथियारों का बढ़ता दबदबा
जैसा की आज के समय में देखा जा रहा है कि आधुनिक सेनाएं तेजी से AI आधारित हथियारों को अपना रही हैं। जो उनको स्मार्ट ड्रोन, रोबोटिक ग्राउंड व्हीकल और समुद्री ड्रोन वाले डिवाइज की सेवा देता हैं। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा बात हो रही है ड्रोन स्वॉर्म तकनीक की। इसके इस्तेमाल को देखे तो इस तकनीक में कई ड्रोन एक साथ काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी भूमिका बदल सकते हैं और अगर कोई एक ड्रोन नष्ट हो जाए तो दूसरा तुरंत उसकी जिम्मेदारी संभाल लेता है। इससे युद्धक्षेत्र में लचीलापन और प्रभावशीलता दोनों बढ़ जाती हैं।
सम्बंधित ख़बरें
‘इस्तीफे का पैंतरा अब नहीं चलेगा!’ सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei की राष्ट्रपति मसूद को चेतावनी
ईरान-ओमान के बीच Hormuz Strait पर फीस वसूलने की डील, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा असर
ईरान में सालाना महंगाई दर 87 फीसदी के पार, सर्वाइवल इकोनॉमी मोड में पहुंचा पूरा देश
POK में बगावत! ट्रंप-ईरान संकट को लेकर क्या बोले मेजर जनरल राजन कोचर? Exclusive Interview
साइबर युद्ध में भी AI की एंट्री
देश और दुनिया में अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं हैं। लेकिन यह साइबर स्पेस को भी शामिल कर चुका है। देखा तो जा रहा है कि AI की मदद से साइबर हमलों का तेजी से पता लगाया जा सकता है और नेटवर्क की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है।
दूसरी तरफ AI का इस्तेमाल दुश्मन के कम्युनिकेशन सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और हथियार नियंत्रण प्रणालियों में सेंध लगाने के लिए भी किया जा सकता है। जो यह तो साफ करता है कि छोटे देश भी AI आधारित साइबर हथियारों के जरिए बड़ी सैन्य शक्तियों को चुनौती देने अब आसान हो गया है।
ये भी पढ़े: Facebook में आया बड़ा AI अपडेट, अब सर्च करना होगा आसान, फोटो और कंटेंट भी बनेंगे पहले से ज्यादा स्मार्ट
भविष्य में AI करेगा पूरा युद्ध कंट्रोल?
इस पूरे मामले को देखने के बाद रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में Minotaur Warfare जैसे मॉडल सामने आ सकते हैं। जहां AI युद्ध संचालन का केंद्रीय हिस्सा होगा। AI इंसानी सैनिकों और उन्नत मशीनों के बीच तालमेल बनाकर तेजी से निर्णय लेने में मदद करेगा। लेकिन जानने वाली बात यह भी है कि इसके साथ गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घातक हथियारों को पूरी तरह स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति मिल गई तो यह मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
