

Moon 5G Network: चांद पर भविष्य के मिशन सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। वहां रोवर, वैज्ञानिक उपकरण, सेंसर और दूसरे सिस्टम भी एक साथ काम करने के लिए तैयार हो रही है। ऐसे में इनके बीच तेज और भरोसेमंद संचार नेटवर्क जरूरी होगा। इसी दिशा में NASA ने चांद पर 5G नेटवर्क विकसित करने के लिए एक नया कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने Modulate Space Corporation को करीब 3.8 करोड़ डॉलर यानी लगभग 320 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इसमें 5G सिस्टम के साथ Wi-Fi 6 की सुविधा भी विकसित की जाएगी।
NASA ने इसको लेकर जानकारी दी है कि परियोजना के पहले हिस्से में ऐसा 5G Network-in-a-Box तैयार किया जाएगा जिसमें नेटवर्क चलाने के लिए जरूरी हार्डवेयर, फर्मवेयर और सॉफ्टवेयर शामिल होंगे। इसका लैब में प्रदर्शन और परीक्षण किया जाएगा। यह चरण 1 अक्टूबर 2026 से 31 जनवरी 2028 तक चलेगा। इसका मकसद यह समझना है कि तैयार तकनीक भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए कितनी उपयोगी और व्यावहारिक है।
वहीं इसके बाद तकनीक की असली परीक्षा चांद की सतह पर होगी। NASA के प्लान के अनुसार 30 नवंबर से 31 दिसंबर 2028 के बीच Lunar 5G और Wi-Fi Integrated Surface Network का फ्लाइट डेमो किया जाएगा। इस दौरान नेटवर्क के प्रदर्शन और संचार क्षमता का आकलन किया जाएगा।
चांद पर 5G का मतलब वहां धरती जैसा मोबाइल इंटरनेट चलाना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्र सतह पर मौजूद अलग-अलग उपकरणों और मिशन टीमों के बीच वायरलेस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। जिसको लेकर NASA ने बताया है कि भविष्य के Moon Base और Artemis अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों को एक-दूसरे तथा वैज्ञानिक टीमों से लगातार संपर्क की जरूरत होगी। वहीं तेज कनेक्टिविटी से रोवर के संचालन, वैज्ञानिक डेटा भेजने, वीडियो और तस्वीरों के ट्रांसफर तथा कई उपकरणों को नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
चांद की सतह पर नेटवर्क बनाना धरती के मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण है। वहां का वातावरण, ऊबड़-खाबड़ इलाका और दक्षिणी ध्रुव के कठिन क्षेत्र रेडियो सिग्नल के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। NASA इसी वजह से रेडियो सिग्नल के फैलाव और नेटवर्क की वास्तविक क्षमता को भी जांचना चाहता है। NASA पहले से ही चांद पर 4G/5G तकनीक की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। इससे पहले 4G/LTE आधारित चंद्र संचार प्रणाली के प्रदर्शन की दिशा में भी काम हो चुका है। अब नया कॉन्ट्रैक्ट भविष्य के ज्यादा व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले चंद्र नेटवर्क की तैयारी का हिस्सा है।