

Tanvi Sharma Wins Taipei Open Super 300: भारत की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने रविवार को ताइपे ओपन सुपर 300 जीतकर अपना पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब हासिल कर लिया। 17 वर्षीय तन्वी ने महिला एकल फाइनल में वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त थ्यू लिन्ह गुयेन को लगातार गेमों में 21-16, 21-16 से हराया। यह मुकाबला केवल 36 मिनट तक चला। इस जीत के साथ वह ताइपे ओपन का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं।
फाइनल की शुरुआत से ही तन्वी आक्रामक नजर आईं। उन्होंने शानदार ड्रॉप शॉट और क्रॉस-कोर्ट स्मैश से गुयेन को लगातार परेशान किया और जल्द ही 4-1 की बढ़त बना ली। इसके बाद उनका दबदबा और बढ़ा तथा स्कोर 10-2 हो गया। हालांकि कुछ गलतियों की वजह से गुयेन ने वापसी की कोशिश की, लेकिन तन्वी ने ब्रेक तक 11- 8 की बढ़त बनाए रखी। ब्रेक के बाद उन्होंने लगातार आक्रामक खेल दिखाया, 15-9 की बढ़त बनाई और आखिरकार क्रॉस-कोर्ट स्मैश के साथ पहला गेम 21-16 से जीत लिया।
दूसरे गेम में गुयेन ने 3-0 की बढ़त बना ली, लेकिन तन्वी ने जल्द ही स्कोर 3-3 कर दिया। इसके बाद उन्होंने नेट पर बेहतरीन खेल और अपने खास भ्रामक शॉट्स की मदद से 11-8 की बढ़त हासिल की। ब्रेक के बाद तन्वी ने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया और 15-10, फिर 18-12 तक पहुंच गईं।
19-12 पर तन्वी ने एक लाइन कॉल को चुनौती दी, लेकिन फैसला उनके खिलाफ गया। इसके बावजूद उन्होंने संयम नहीं खोया और दमदार स्मैश के साथ सात मैच प्वाइंट हासिल किए। शुरुआती तीन मौके गंवाने के बाद उन्होंने चौथे प्रयास में जीत दर्ज करते हुए अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम कर लिया।
जीत के बाद तन्वी ने अपने कोच पार्क ताए-सांग के साथ भावुक पल साझा किया। उन्होंने अपना गोल्ड मेडल उतारकर कोच के गले में पहनाया। पार्क ताए-सांग इससे पहले भारतीय स्टार पीवी सिंधु के भी कोच रह चुके हैं। दक्षिण कोरिया के पूर्व शटलर पार्क ताए-सांग की कोचिंग में ही तन्वी शर्मा ने जूनियर सर्किट से लेकर अपने पहले सीनियर बीडब्ल्यूएफ खिताब तक का सफर तय किया है।
17 साल 222 दिन की उम्र में तन्वी ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बन गईं। उन्होंने दक्षिण कोरिया के दिग्गज खिलाड़ी ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ा, जो 2006 में 17 साल 287 दिन की उम्र में इस टूर्नामेंट के पुरुष युगल फाइनल में पहुंचे थे।
तन्वी ने 16 साल की उम्र में 2025 यूएस ओपन सुपर 300 के फाइनल में पहुंचकर सीनियर सर्किट में अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद वह ओडिशा मास्टर्स और गुवाहाटी मास्टर्स की उपविजेता रहीं। अब ताइपे ओपन जीतने के बाद उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड टूर खिताब हासिल कर लिया है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर वह दुनिया की टॉप-35 रैंकिंग में भी जगह बना चुकी हैं।
पूर्व जूनियर वर्ल्ड नंबर-1 तन्वी पहले ही जूनियर और सीनियर स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। वह वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने गर्ल्स सिंगल्स में रजत और मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा, वह उस भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं जिसने एशियन टीम चैंपियनशिप में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।