Jyothi Surekha Vennam Silver Upgrade: डोपिंग में फंसी मैक्सिकन तीरंदाज, ज्योति सुरेखा का ब्रॉन्ज बना सिल्वर

Archery World Cup Final 2025: चीन के नानजिंग में हुए 2025 आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल के बाद वर्ल्ड आर्चरी ने ज्योति सुरेखा वेन्नम के ब्रॉन्ज मेडल को सिल्वर मेडल में बदल दिया।
Mexican archer caught in doping scandal; Jyothi Surekha's bronze upgraded to silver.
ज्योति सुरेखा और मरीना बर्नाल (सोर्स- AIइमेज )
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Jyothi Surekha Wins Silver In Archery World Cup Finals: चीन के नानजिंग में आयोजित 2025 आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल के ब्रॉन्ज मेडल मैच में ग्रेट ब्रिटेन की एला गिब्सन को 150-145 के परफेक्ट स्कोर से हराकर इतिहास रचने वाली भारत की ज्योति सुरेखा वेन्नम के पदक को वर्ल्ड आर्चरी ने अब सिल्वर मेडल में अपग्रेड कर दिया है।

क्या था मामला ?

रिपोर्ट के अनुसार, फाइनलिस्ट मैक्सिकन तीरंदाज मरीना बर्नाल को नैंड्रोलोन (Drug) नामक डोपिंग के प्रयोग करने की वजह से उन्हें अधिकारिक तौर पर मैच से बाहर कर दिया गया है। इसी फैसले के बाद ज्योति सुरेखा वेन्नम को सिल्वर मेडल दिया गया। सुरेखा वेन्नम यह मेडल पाने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं।

बर्नाल ने किस रूल का किया उल्लंघन?

मरीना बर्नाल का खेल के दौरान लिए गए सैंपल में वर्ल्ड आर्चरी फेडरेशन के नियम 3 का उल्लंघन करने वाला पाया गया। मैक्सिको की तीरंदाज मरीना बर्नाल का जब खेल से बाहर टेस्ट लिया गया, तो उनके सैंपल में 'नैंड्रोलोन' नाम का स्टेरॉयड पाया गया।

ये दवा बॉडी बनाने और ताकत बढ़ाने के लिए बैन है। वर्ल्ड आर्चरी के रूल 3 के तहत प्रतिबंधित दवा का शरीर में मिलना एक बहुत बड़ा अपराध माना जाता है। जिसके कारण प्रतियोगिता के नतीजों में आधिकारिक बदलाव किया गया।

2028 तक लगा बैन

रिपोर्ट आने के बाद,  23 साल की मैक्सिकन एथिलीट बर्नाल ने अपनी गलती मान ली है। बता दें कि सितंबर में प्रतियोगिता के बाहर हुए टेस्ट में वो एनाबॉलिक स्टेरॉयड (नैंड्रोलोन) के लिए पॉजिटिव पाई गई। जिसके नतीजे में, ग्रेट ब्रिटेन की एला गिब्सन को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया है। उन पर 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के बाद तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।

ज्योति का प्रदर्शन और फाॅर्म

एशियन गेम्स की ऐतिहासिक रिकाॅर्ड में ज्योति ने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में वो कर दिखाया जो कोई भारतीय नहीं कर सका था। उन्होंने एक ही सीजन में 3 गोल्ड मेडल (व्यक्तिगत, महिला टीम और मिक्स्ड टीम) जीतकर इतिहास रच दिया था।

उनकी अद्भुद खेल प्रदर्शन के लिए भारत सरकार उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। आज भारत में कंपाउंड तीरंदाजी को जो पहचान मिली है तो उसमें ज्योति सुरेखा का बहुत बड़ा योगदान है। वो देश की हजारों बेटियों के लिए एक प्रेरणा हैं।

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