Gagan Narang Birthday: पायलट बनने के सपने से लेकर शूटिंग तक का सफर, राइफल दिलाने के लिए पिता ने बेच दिया था घर
Olympic Medalist Gagan Narang Birthday: लंदन ओलंपिक में तिरंगा लहराने वाले गगन नारंग की कहानी। जानिए कैसे एक पिता ने बेटे की राइफल के लिए बेच दिया था घर। 15 सालों तक रहे किराए के मकान में।
- Written By: अमन मौर्या
गगन नारंग (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Olympic Medalist Gagan Narang: देश के स्टार शूटर और ओलंपिक पद विजेता गगन नारंग का आज जन्मदिन है। नारंग ने देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। गगन नारंग पहले भारतीय शूटर हैं, जो लंदन ओपंपिक में क्वालीफाइड हुए थे। 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में नारंग नें पुरुष श्रेणी में 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में 701.1 प्वाइंट के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया था। इस खिलाड़ी का बचपन बड़ा ही दिलचस्प है। गगन ने काफी उम्र में ही सफलता हासिल की।
20 की उम्र में जीता स्वर्ण पदक
2003 में एफ्रो एशियन गेम्स में शूटिंग प्रतियोगिता में गगन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। 2006 में मेलबर्न में हुए कॉनवेल्थ गेम्स के अलग-अलग प्रतियोगिता में गगन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके बाद 2008 में चीन में हुए विश्वकप में भी गगन ने स्वर्ण पदक जीता।
पायलट बनना चाहते थे नारंग
6 मई, 1983 को जन्मा यह खिलाड़ी बचपन से वायुसेना में पायलट बनना चाहता था। गगन के पिता भीमसेन नारंग बताते हैं, नारंग में बचपन में ही निशानेबाजी की प्रतिभा दिख गई थी। उनके अनुसार, 2 साल की उम्र गगन ने बलून पर पिस्टल से निशाना लगाया था। उसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनका बेटा निशानेबाजी में काफी आगे जा सकता है।
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कॉमनवेल्थ में जीते 4 पदक
साल 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गगन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 4 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इसमें 10 मीटर और 50 मीटर एयर राइफल कैटेगरी शामिल थी। ऐसा करने वाले वो पहले भारतीय बन गए। 2010 में ही एशियाई गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया था।
इसके अलावा बैंकाक में होने वाले ISSF विश्व कप के फाइनल में गगन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस उपलब्धि के बाद गगन की रैंकिंग बढ़ गई और वह अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में शीर्ष निशानेबाजों में शुमार हो गए। अंतरराष्ट्रीय खेलों में यह सफलता हासिल करने वाले गगन नारंग तीसरे भारतीय निशानेबाज बन गए थे।
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15 साल रहे किराए के मकान में
गगन का बचपन काफी संघर्षों में बीता। उनके पिता एयर इंडिया में चीफ मैनेजर थे। गगन को शूटिंग प्रैक्टिस के लिए राइफल दिलाने के लिए उनकों अपना घर तक बेचना पड़ा। इसके बाद वे अपने परिवार के साथ 15 सालों तक किराए के मकान रहे। पिता ने उन्हें एयर पिस्टल के उपयोग की छूट देने का साथ ही साल 1997 में गगन की शूटिंग की जर्नी शुरू हुई। गगन इसी से लगातार अभ्यास करते रहे।
सफलता का श्रेय गगन अपने परिवार को देते हुए कहते हैं कि उनकी मदद से ही आज वो इस मुकाम पर हैं। खेल में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए गगन नारंग को भारत सरकार की तरफ से राजीव गांधी खेल रत्न, पद्म श्री अवार्ड, अर्जुन पुरस्कार और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार जैसे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
