दिव्या देशमुख का अगला टारगेट पुरूष खिलाड़ी, स्विस शतरंज टूर्नामेंट में मिली वाइल्ड कार्ड एंट्री

Swiss Chess Tournament: शतरंज की दुनिया में वर्ल्ड चैंपियन बनकर उभरी दिव्या देशमुख का अब अगला टार्गेट पुरुष खिलाड़ियों को मात देना होगा। इसके लिए उन्हें स्विस में खास वाइल्ड कार्ड एंट्री मिल गई है।
Swiss Chess Tournament: शतरंज की दुनिया में वर्ल्ड चैंपियन बनकर उभरी दिव्या देशमुख का अब अगला टार्गेट पुरुष खिलाड़ियों को मात देना होगा। इसके लिए उन्हें स्विस में खास वाइल्ड कार्ड एंट्री मिल गई है।
दिव्या देशमुख (सौजन्य-IANS)
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Divya Deshmukh in Swiss Chess Tournament: दिव्या देशमुख अगले महीने उज्बेकिस्तान में होने वाले फिडे ग्रैंड स्विस शतरंज टूर्नामेंट में पुरुष खिलाड़ियों का सामना करेंगी। अगर वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के महिला वर्ग में खेलतीं तो खिताब जीतने की उनकी संभावना और मजबूत होती। लेकिन उन्होंने ओपन श्रेणी में (जहां शतरंज में महिलाओं को पुरुषों के साथ खेलने की पूरी स्वतंत्रता होती है) निचली वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों में से एक के रूप में शुरुआत करने का फ़ैसला किया है।

फिडे ने उन्हें व रूस की अलेक्ज़ांड्रा गोरयाचकिना को ओपन सेक्शन में वाइल्ड कार्ड दिया है। ग्रैंड स्विस की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसके चैम्पियन और उपविजेता अगले साल होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफ़ाई करेंगे। यही टूर्नामेंट विश्व चैंपियनशिप के लिए चयन प्रतियोगिता है। दिव्या और गोरयाचकिना पहले ही कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफ़ाई कर चुकी हैं।

विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला

दिव्या ने हाल ही में विश्व कप जीतकर और गोरयाचकिना ने फिडे विमेंस ग्रां प्री जीतकर यह उपलब्धि हासिल की। इसलिए ग्रैंड स्विस के ओपन वर्ग में खेलने का उनका फ़ैसला समझदारी भरा है। परिणाम चाहे जो भी हो समरकंद में यह अनुभव दोनों के लिए बहुमूल्य होगा। विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने के बाद 19 वर्षीय दिव्या अपने करियर के बेहद अहम मुक़ाम पर हैं। अधिक रेटिंग वाले पुरुष खिलाड़ियों के साथ खेलना उन्हें और मजबूत खिलाड़ी बनाएगा। विश्व कप फ़ाइनल में दिव्या से हारने वाली कोनेरू हम्पी इसका बड़ा उदाहरण हैं। भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर हम्पी ने बचपन से ही अधिक से अधिक ओपन टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने की कोशिश की। अक्सर उन्होंने पुरुष खिलाड़ियों के अहंकार को चोट पहुंचाई। 1999 में उन्होंने एशियाई अंडर-12 लड़कों की चैम्पियनशिप जीतकर सबको चौंकाया। राष्ट्रीय पुरुष ‘ए’ चैम्पियनशिप में भी उन्होंने लगातार शानदार जीत दर्ज की थी।

पॉलगार ने हराया था कास्पारोव व आनंद को

हंगरी की जुडिट पॉलगार वह खिलाड़ी थीं, जिन्होंने हम्पी और अन्य महिला योद्धाओं को शतरंज की बिसात पर रास्ता दिखाया। कभी वह पुरुषों की विश्व रैंकिंग में नंबर 8 तक पहुंची थीं (बाद में ‘ओपन’ शब्द प्रचलित हुआ)। उन्होंने कई पुरुष विश्व चैंपियनों को हराया था, जिनमें गैरी कास्पारोव और विश्वनाथन आनंद भी शामिल हैं।

जुडिट पॉलगार से पहले भी स्वीडन की महान खिलाड़ी पिया क्रैमलिंग जैसी महिलाएं थीं, जिन्होंने ओपन और महिला दोनों ओलंपियाड्स में खेलकर मिसाल पेश की। अब वापस ग्रैंड स्विस की ओर लौटें इस प्रतियोगिता के मौजूदा चैम्पियन दोनों ही भारतीय हैं। यह भारत के शतरंज इतिहास के सबसे शानदार पलों में से एक था जब 2023 के अंत में आइल ऑफ मैन में विदित गुजराती ने ओपन वर्ग में और आर। वैशाली ने महिला वर्ग में अप्रत्याशित रूप से खिताब जीता।

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