कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास, डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज जीतकर भारत को दिलाया पहला पदक

CWG 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में 7976 अंकों के साथ कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वो इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।
Commonwealth Games 2026: Tejaswin Shankar creates history, wins India's first-ever medal in decathlon.
तेजस्विन शंकर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Tejaswin Shankar Wins Bronze In Decathlon CWG 2026: भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। उन्होंने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इस प्रतियोगिता में भारत को पहला पदक दिलाया है। इसके साथ ही वो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में दो अलग-अलग एथलेटिक्स स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी बन गए है। इससे पहले उन्होंने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

तेजस्विन ने बढ़ाया भारत का मान

27 वर्षीय तेजस्विन ने कुल 7976 अंक हासिल कर के तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। ग्रेनाडा के विक्टर लिंडन ने 8096 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि कनाडा के डेमियन वॉर्नर 8036 अंक लेकर रजत पदक विजेता बने। एशियाई खेलों के मौजूदा चैंपियन तेजस्विन ने डेकाथलॉन के सबसे कठिन मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन कर दिया है।

कैसा रहा तेजस्विन का प्रदर्शन?

तेजस्विन ने प्रतियोगिता की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में 10.96 सेकंड का समय निकालकर की, जिससे उन्हें 870 अंक मिले। इसके बाद लंबी कूद में 7.82 मीटर की छलांग लगाकर 1015 अंक हासिल किए और कुल अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गए। शॉट पुट में उन्हें 673 अंक मिले, जबकि हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर 944 अंक जुटाए। 400 मीटर दौड़ में पांचवें स्थान पर रहने के बाद उन्हें 837 अंक मिले। पहले दिन के पांच मुकाबलों के बाद उनके कुल 4339 अंक थे और वो दूसरे स्थान पर बने हुए थे।

दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़ में तेजस्विन ने 922 अंक हासिल किए। डिस्कस थ्रो में उन्हें 674 अंक और पोल वॉल्ट में 704 अंक मिले, जिससे वो चौथे स्थान पर खिसक गए। हालांकि भाला फेंक में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने फिर से तीसरा स्थान हासिल कर लिया। इसके बाद 1500 मीटर दौड़ में 704 अंक जुटाकर उन्होंने कुल 7976 अंकों के साथ कांस्य पदक पक्का कर लिया।

मुकाबले के बाद क्या बोले तेजस्विन?

ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद, भावुक तेजस्विन शंकर ने बहुत राहत और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि घुटने की गंभीर समस्या के कारण लगभग प्रतियोगिता से बाहर होने की नौबत आने के बाद, पोडियम पर खड़े होना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने बताया कि घुटने की चोट के कारण व्यक्तिगत हाई जंप इवेंट से हटने के बाद, डेकाथलॉन के लिए उनका सिर्फ एक ही था लक्ष्य हर सेशन पर ध्यान देना और बिना और चोट खाए एक-एक करके इवेंट्स को पूरा करना था।

ये मानते हुए कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि वे सभी दस इवेंट्स पूरे कर पाएंगेमेडल जीतने की तो बात ही छोड़ देंशंकर ने अपनी मेडिकल टीम को 48 घंटों में उन्हें खेलने के लिए तैयार करने का श्रेय दिया और ये उपलब्धि उन सभी लोगों को समर्पित की जिन्होंने उन पर भरोसा बनाए रखा। लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक की ओर देखते हुए, उन्होंने माना कि हालांकि उनकी जंप और स्प्रिंट मजबूत हैं, लेकिन दुनिया के बेहतरीन एथलीटों को चुनौती देने और अंतर को पाटने के लिए उन्हें अपने टेक्निकल थ्रो और पोल वॉल्ट के प्रदर्शन में तेजी से सुधार करना होगा।

कैसे हुई करियर की शुरुआत?

तेजस्विन भारत के राष्ट्रीय डेकाथलॉन में रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं और अमेरिका की कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके हैं, जहां उन्होंने हाई जंप में दो एनसीएए डिवीजन-1 खिताब जीते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हाई जंप से की थी और 2018 में 2.29 मीटर की छलांग लगाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप का कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने संयुक्त स्पर्धाओं पर ध्यान केंद्रित किया और 2022 एशियाई खेलों में डेकाथलॉन का रजत पदक भी अपने नाम किया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डेकाथलॉन का कांस्य जीतकर उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक और नया अध्याय जोड़ दिया।

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