

नवजोत सिंह सिद्धू आज मना रहे हैं अपना 63वां जन्मदिन
सिद्धू को क्यों और कैसे मिला 'जॉन्टी सिंह' का नाम
करियर के ढलान पर फिटनेस में किया था बहुत बड़ा सुधार
ये हैं सिद्धू की मशहूर मोटिवेशनल और प्रेरणादायक शेरो-शायरी
Sidhu Motivational Career And Shayari: नवजोत सिंह सिद्धू 20 अक्टूबर 2026 को अपना 63वां जन्मदिन मनाने वाले हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीवी पर्सनालिटी नवजोत सिंह सिद्धू को दुनिया उनके बेबाक अंदाज, छक्कों और शानदार शायरी के लिए जानती है। उन्हें 'शेरी' और 'सिक्सर सिद्धू' जैसे कई नामों से पुकारा गया। लेकिन उनके करियर से जुड़ा एक उपनाम बेहद खास है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। वह नाम है 'जॉन्टी सिंह'। यह नाम उन्हें उस दौर में मिला जब दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज खिलाड़ी जॉन्टी रोड्स को दुनिया का सबसे बेहतरीन फील्डर माना जाता था।
नवजोत सिंह सिद्धू जब भारतीय क्रिकेट टीम में आए थे, तब उनकी फील्डिंग को काफी औसत दर्जे का माना जाता था। मैदान पर उनकी धीमी चाल और सुस्ती पर अक्सर सवाल उठते थे। उस जमाने में माना जाता था कि सिद्धू केवल अपनी बल्लेबाजी के दम पर टीम में जगह बनाए हुए हैं। हालांकि, सिद्धू के अंदर खुद को हर रोल में साबित करने की एक खास जिद थी, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।
जब सिद्धू अपने करियर के उत्तरार्ध यानी ढलान पर पहुंचे, तो उन्होंने आलोचकों के मुंह बंद करने का मन बनाया। उन्होंने अपनी फिटनेस और ग्राउंड फील्डिंग पर दिन-रात कड़ी मेहनत शुरू कर दी। कुछ ही समय में उनकी फील्डिंग में इतना अद्भुत सुधार आया कि पूरी भारतीय टीम और ड्रेसिंग रूम हैरान रह गया। मैदान पर उनकी चीते जैसी फुर्ती देखकर उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें प्यार और सम्मान से 'जॉन्टी सिंह' कहना शुरू कर दिया।
सिद्धू की फील्डिंग में आए इस सुधार का असर उनके आंकड़ों में भी साफ झलकता है। अपने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू करियर में उन्होंने कई अहम मौकों पर शानदार कैच लपके और रन-आउट किए।
टेस्ट क्रिकेट के 51 मैचों में 9 कैच
वनडे क्रिकेट मैच के 136 मैचों में 20 कैच और 2 रन-आउट
फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 157 मैचों में 50 कैच
अपने जीवन में लगातार बदलाव लाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू दूसरों को प्रेरित करने के लिए भी जाने जाते हैं। टीवी शो और सोशल मीडिया पर उनकी मोटिवेशनल शायरी काफी लोकप्रिय है। मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने के लिए उनकी एक मशहूर शायरी है...
"कांटों में रहकर भी गुलाबों की तरह महकना सीखो,
कीचड़ में रहकर भी कमल की तरह खिलना सीखो।
जो परिस्थितियों से घबरा जाए, वो लौह पुरुष नहीं हो सकता,
राख में रहकर भी अंगारों की तरह दहकना सीखो।"
इसके अलावा, आत्मसम्मान और पहचान को लेकर वे अक्सर कहते हैं:
"नाम ही खो दोगे तो किधर जाओगे,
और पहचान ही खो दोगे तो, बिखर जाओगे।"
वही हुनरमंद लोगों के शांत स्वभाव पर उनकी यह पंक्तियां काफी पसंद की जाती हैं:
"परिंदों को हमेशा उनकी मंजिल मिलती है क्योंकि उनके फैले हुए पंख बोलते हैं;
अक्सर वही लोग खामोश रहते हैं जिनके हुनर बोलते हैं।"
नवजोत सिंह सिद्धू ने बॉलीवुड स्टार सलमान खान के लिए एक बार एक बहुत ही प्रसिद्ध 'बाज वाली शायरी' सुनाई थी, जो काफी वायरल हुई थी:
"हमारा कबूतर का भूखा नहीं है, बाज की ज़िंदगी है ज़ाहिदाना...
पलटना, झपटना और झपटकर पलटना, खून गर्म रखने का यह तो है एक बहाना।
जब बिजली चमकती है और बारिश होती है, तो छोटी चिड़िया पीपल के पेड़ में छिप जाती है,
लेकिन बाज बादलों के ऊपर उड़ता है।"
सिद्धू की यह जीवन यात्रा और उनका अंदाज दिखाता है कि अगर इंसान ठान ले, तो वह अपनी कमियों को भी अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकता है।