मंसूर अली खान पटौदी (फोटो-सोशल मीडिया)
स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का भारत के बेहतरीन कप्तानों में शुमार हैं। 5 जनवरी 1941 में उनका जन्म हुआ था। आज उनका 83वां वर्षगांठ मनाया जा रहा है। उन्होंने कई रिकॉर्ड हासिल किए। उन्हें टाइगर पटौदी और नवाब पटौदी जूनियर के नाम से भी जाना जाता है।
16 साल की उम्र में खान ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सुसेक्स के लिए डेब्यू किया। ऑक्सफोर्ड के लिए खेलने वाले मंसूर अली खान पटौदी पहले भारतीय क्रिकेटर थे। 1 जुलाई 1961 को एक कार दुर्घटना में टूटी हुई विंडस्क्रीन से कांच का एक टुकड़ा घुस गया और उनकी दाहिनी आंख को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। 6 महीने से भी कम समय पहले अपनी आंख की चोट के बावजूद, उन्होंने दिसंबर 1961 में दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।
इस एक्सीडेंट के बाद उनके क्रिकेट करियर पर हमेशा के लिए खत्म होने का खतरा मंडरा रहा था, क्योंकि उन्हें दो इमेज दिखाई देने लगी थीं, परंतु पटौदी जल्दी ही नेट प्रैक्टिस पर लौटे और एक आंख के साथ ही बेहतरीन खेलने लगे। उसके बाद वो भारतीय टीम के कप्तान भी जल्द ही बन गए।
1962 में नारी कॉन्ट्रैक्टर के कप्तानी में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज का दौरा किया। बारबाडोस के खिलाफ अभ्यास मैच में तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की गेंद भारतीय कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर में लगी और वे पिच पर ही गिर गए। चोट इतनी गंभीर थी कि कॉन्ट्रैक्टर के नाम और कान से खून से निकलने लगा। टीम के मैनेजर गुलाम अहमद ने उपकप्तान पटौदी को बताया कि वो अगले मैच में कप्तानी करेंगे। उस चोट के बाद नारी कॉन्ट्रैक्टर का करियर खत्म हो गया।
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टाइगर पटौदी दाहिने हाथ के बल्लेबाज और मध्यम गति के तेज गेंदबाज थे। साथ ही टाइगर को उस समय दुनिया का बेस्ट फील्डर कहा जाता था। उनका करियर 46 टेस्ट मैचों का रहा, जिनमें से 40 में वह कप्तान (1962-1975) रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने 9 मैच जीते, 12 मैच ड्रॉ रहे और 19 मैचों में हार मिली। टाइगर पटौदी की कप्तानी के आंकड़े उतने अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने टीम में जीतने का जुनून पैदा किया। 22 सितंबर 2011 को लंबी बीमारी के चलते टाइगर ने 70 साल की उम्र दुनिया को अलविदा कह दिया था।