वो खिलाड़ी जिसे लोग कहते थे मैसूर एक्सप्रेस, पाकिस्तान के खिलाफ दिखाया था रौद्र रूप

Javagal Srinath Birthday: जवागल श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजी का नया आयाम स्थापित किया। उनकी रफ्तार, स्विंग और सटीकता ने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई।
वो खिलाड़ी जिसे लोग कहते थे मैसूर एक्सप्रेस, पाकिस्तान के खिलाफ दिखाया था रौद्र रूप
जवागल श्रीनाथ (फोटो-सोशल मीडिया)
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Happy Birthday Javagal Srinath: भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज, जवागल श्रीनाथ आज 31 अगस्त को अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजी की एक नई मिसाल कायम की और अपनी गेंदबाजी से क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

जब भारतीय टीम के बल्लेबाजी में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज अपनी जगह बना चुके थे, तब श्रीनाथ ने गेंदबाजी विभाग में भारतीय टीम को मजबूती प्रदान की। अपनी तेज गेंदबाजी और सटीक लाइन-लेंथ के लिए प्रसिद्ध श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

मैसूर एक्सप्रेस के नाम से हुए मशहूर

'मैसूर एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 को मैसूर, कर्नाटक में हुआ था। श्रीनाथ दाएं हाथ के गेंदबाज थे। जब वह घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे तो उनके सामने भारतीय तेज गेंदबाज के रूप में एकमात्र सफल चेहरा कपिल देव का था। कपिल देव के बाद अगर किसी भारतीय तेज गेंदबाज ने टीम में अपनी जगह पक्की की और लंबे समय तक भारतीय आक्रमण की अगुवाई की तो वह श्रीनाथ थे।

बल्लेबाजों को चकमा देने में थे माहिर

श्रीनाथ की गेंदबाजी में तेजी, स्विंग और धीमी गेंदों का बेहतरीन मिश्रण था, जो विपक्षी बल्लेबाजों को अक्सर चकमा दे जाता था। वह भारत के साथ-साथ विदेशी पिचों पर भी समान रूप से सफल थे। करियर के बेहतरीन दौर में श्रीनाथ को 1997 में इंजरी हुई थी और इस वजह से उन्हें लगभग पूरे साल क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था।

1998 रहा करियर का सर्वश्रेष्ठ साल

ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि शायद उनकी वापसी न हो, लेकिन वह लौटे और 1998 उनके करियर का श्रेष्ठ साल रहा। हालांकि उनका रफ्तार का तूफानी अंदाज अब पहले जैसा नहीं रहा था। इसके बावजूद कई मौकों पर उनकी गति भारतीय क्रिकेट में चर्चाओं में रही। एक दशक तक भारतीय तेज गेंदबाजी का प्रमुख चेहरा रहे श्रीनाथ 2002 में श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की विजेता रही भारतीय टीम के सदस्य थे। 2003 वनडे विश्व कप का फाइनल खेलने वाली टीम इंडिया के लिए भी श्रीनाथ ने अहम योगदान दिया।

2003 वर्ल्ड कप के लिए की थी संन्यास से वापसी

2003 विश्व कप में भाग लेने की श्रीनाथ की कहानी बेहद रोचक है। उन्होंने विश्व कप से पहले ही संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन तब कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें संन्यास से वापस आकर विश्व कप खेलने के लिए तैयार किया। श्रीनाथ ने 2003 विश्व कप के 11 मैचों में 16 विकेट लेकर भारत को फाइनल में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। भारत के लिए श्रीनाथ 4 विश्व कप (1992, 1996, 1999, 2003) खेले। श्रीनाथ वनडे विश्व कप के इतिहास में 44 विकेट लेकर जहीर खान के साथ संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर थे। 2023 वनडे विश्व कप में मोहम्मद शमी ने ये रिकॉर्ड तोड़ा। शमी वनडे विश्व कप मैचों में 55 विकेट ले चुके हैं।

ऐसा रहा जवागल श्रीनाथ करियर

1991 में डेब्यू करने वाले जवागल श्रीनाथ ने 67 टेस्ट मैचों में 236 और 229 वनडे में 315 विकेट लिए। श्रीनाथ निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी थे। टेस्ट में 4 अर्धशतक लगाते हुए 1,009 रन उन्होंने बनाए। वनडे में भी उनके नाम एक अर्धशतक है। 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। कपिल देव के बाद श्रीनाथ टेस्ट में 200 विकेट लेने वाले भारत के दूसरे तेज गेंदबाज थे।

श्रीनाथ वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय तेज गेंदबाज हैं। वहीं, इस फॉर्मेट में भारत के सबसे सफल गेंदबाजों की सूची में उनका स्थान अनिल कुंबले के बाद दूसरा है। कुंबले और श्रीनाथ की स्पिन और तेज गेंदबाजी की जोड़ी 1991 से 2003 तक बेहद चर्चित रही थी।

सबसे तेज गेंद फेंकने का बनाया था रिकॉर्ड

श्रीनाथ ने 1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 154.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। यह गेंद 2023 तक वनडे में किसी भारतीय गेंदबाज की फेंकी गई सबसे तेज गेंद थी। 2023 में श्रीलंका के खिलाफ उमरान मलिक ने 157 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गेंद फेंक श्रीनाथ का रिकॉर्ड तोड़ा था। उस मैच में 8 ओवर में 37 रन देकर 3 विकेट लेते हुए श्रीनाथ ने भारत की जीत सुनिश्चित की थी।

संन्यास के बाद जवागल श्रीनाथ ने कमेंट्री और कोचिंग की जगह मैच रेफरी को पेशे के रूप में चुना। मौजूदा समय में वह आईसीसी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित रेफरी में से एक हैं। भारत सरकार ने क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए 1999 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा था। (आईएएनएस)

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