क्या Heinrich Klaasen फिर से इंटरनेशनल क्रिकेट में करेंगे वापसी? SRH के धाकड़ बल्लेबाज ने खुद उठाया पर्दा

Heinrich Klaasen: दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी से इनकार किया। परिवार को समय देने के कारण उन्होंने टी20 लीग और निजी जीवन पर ध्यान देने का फैसला किया।
Heinrich Klaasen rules out international comeback
हेनरिक क्लासेन (फोटो-सोशल मीडिया)
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Heinrich Klaasen: दक्षिण अफ्रीका के आक्रामक बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी नहीं करने का फैसला किया है। क्लासेन ने यह कदम परिवार को समय देने और निजी प्राथमिकताओं के कारण उठाया है। 34 वर्षीय क्लासेन ने पिछले साल जून में दक्षिण अफ्रीका का केंद्रीय अनुबंध नहीं मिलने के बाद सभी अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों से विदा ली थी। वह फिलहाल टी20 लीग में खेलते हैं और अपने फॉर्म को बनाए रख रहे हैं।

आईपीएल द्वारा जारी किए गए सोशल मीडिया वीडियो में क्लासेन ने सनराइजर्स हैदराबाद के साथी खिलाड़ी नितिश कुमार रेड्डी से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने दो सप्ताह तक वापसी के फैसले पर विचार किया, लेकिन अंततः उन्होंने परिवार के लिए समय देने के कारण इसे ठुकरा दिया।

Heinrich Klaasen ने बताया क्यों वापसी का नहीं लिया फैसला?

हेनरिक क्लासेन ने कहा, “मुझे अपने दोस्तों को टी20 विश्व कप में खेलते देख लग रहा था कि मैं उनके साथ क्यों नहीं हूं। मैंने वापसी के बारे में सोचा और एडेन मार्करम से भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर टीम में जगह मिले तो मैं जरूर लौटूंगा, लेकिन विश्व कप के बाद मुझे लगा कि ऐसा नहीं होगा। इसलिए मैंने वापसी नहीं करने का फैसला किया।”

उन्होंने 2024 में ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था और अब पूरी तरह से टी20 लीग और निजी जीवन पर ध्यान देने का निर्णय लिया है। 34 साल के क्लासेन 2025 के चैंपियंस ट्रॉफी में आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए दिखे थे। टूर्नामेंट में उनकी टीम दक्षिण अफ्रीका को सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों 50 रन से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।

अभिषेक और ट्रेविस के बाद बल्लेबाजी काफी आसान

वहीं मुकाबले के बाद हेनरिक क्लासेन ने जियहॉटस्टार पर खास बातचीत में कहा, "अभिषेक शर्मा और ट्रेविस के बाद बल्लेबाजी करने की यही खूबी है, जब आप अंदर आते हैं और रन रेट पहले से ही 14 या 15 होता है, तो आपको तुरंत स्विंग शुरू करने की जरूरत महसूस नहीं होती। इससे आपको थोड़ा समय मिलता है, बाद में बराबरी कर पाते हैं, बजाय कि पहली गेंद से ही जोर डालें। हमने पिछले कुछ सालों में अपनी गलतियों से सीखा है।"

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