Sunil Gavaskar 76th Birthday: जानिए ‘लिटिल मास्टर’ सुनील गावस्कर के जीवन के अनसुने किस्से और बड़े रिकॉर्ड
Sunil Gavaskar Birthday Special: भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज और 'लिटिल मास्टर' सुनील गावस्कर आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। जानिए उनके बचपन की कहानियों से लेकर रिकॉर्ड्स स्टोरी।
- Written By: सृष्टि मौर्य
सुनील गावस्कर (सोर्स- A.I इमेज)
Untold Stories Of Sunil Gavaskar: भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुंबई में हुआ था। उनके जन्म के तुरंत बाद अस्पताल में गलती से उन्हें एक मछुआरे के बच्चे से बदल दिया गया था। लेकिन उनके मामा नारायण मसुरेकर ने उनके कान के पास मौजूद एक छोटे से जन्म के निशान को पहचान लिया। इसके बाद अस्पताल में तलाश की गई और सुनील गावस्कर सुरक्षित अपने परिवार को सौंप दिए गए।
क्रिकेट परिवार से मिला खेल का संस्कार
सुनील गावस्कर का क्रिकेट से रिश्ता बचपन से ही जुड़ा हुआ था। उनके पिता मनोहर गावस्कर क्लब क्रिकेट खेलते थे, जबकि उनके मामा माधव मंत्री भारतीय टेस्ट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज रह चुके थे। गावस्कर अक्सर कहते थे कि अपने मामा को भारत की सफेद जर्सी में खेलते देखकर ही उनके मन में देश के लिए खेलने का सपना जगा।
गावस्कर के भाई मिलिंद गावस्कर भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके हैं। वहीं उनकी बहन नूतन ने भारत में महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई और महिला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मानद महासचिव भी रह चुकी हैं। उनकी छोटी बहन कविता की शादी भारत के महान बल्लेबाज और गावस्कर के करीबी दोस्त गुंडप्पा विश्वनाथ से हुई।
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सुनील गावस्कर अपने परिवार के साथ (सोर्स- सोशल मीडिया)
परिवार और निजी जीवन
सुनील गावस्कर की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। साल 1973 में वानखेड़े स्टेडियम में एक मैच के दौरान कानपुर की छात्रा मार्शनील मेहरोत्रा उनसे ऑटोग्राफ लेने पहुंचीं। पहली ही मुलाकात में दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। इसके बाद गावस्कर खुद उनके परिवार से मिलने कानपुर पहुंचे और शादी का प्रस्ताव रखा। दोनों ने 23 सितंबर 1974 को शादी की। उनकी पत्नी, जिन्हें प्यार से ‘पम्मी’ कहा जाता है, हमेशा उनके हर सफर में उनके साथ खड़ी रहीं।
सुनील और मार्शनील के बेटे रोहन गावस्कर का जन्म 1976 में हुआ। उनका नाम गावस्कर के पसंदीदा वेस्टइंडीज बल्लेबाज रोहन कन्हाई के नाम पर रखा गया। रोहन ने भी भारत के लिए वनडे क्रिकेट खेला और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। आज वो अपने पिता की तरह क्रिकेट कमेंट्री की दुनिया में सक्रिय हैं।
सुनील गावस्कर और मार्शनील गावस्कर (सोर्स- सोशल मीडिया)
‘लिटिल मास्टर’ बनने का सफर
सुनील गावस्कर को दुनिया ‘द लिटिल मास्टर’ के नाम से जानती है। उन्होंने 1971 से 1987 तक भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उस दौर में जब बल्लेबाज बिना हेलमेट के दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों का सामना करते थे, तब गावस्कर ने अपने दमदार खेल से पूरी दुनिया को प्रभावित किया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को सिर्फ मुकाबला करना ही नहीं, बल्कि जीतना भी सिखाया।
सुनील गावस्कर के क्रिकेट करियर रिकॉर्ड –
| रिकॉर्ड | आंकड़े / संख्या | खासियत |
|---|---|---|
| डेब्यू टेस्ट सीरीज रन | 774 रन | डेब्यू टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन |
| डेब्यू सीरीज औसत | 154.80 | वेस्टइंडीज दौरा (1971) |
| पहला 10,000 टेस्ट रन | 10,000 रन | टेस्ट क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बल्लेबाज |
| टेस्ट शतक | 34 | सर डॉन ब्रैडमैन (29) का रिकॉर्ड तोड़ा |
| वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट रन | 2,749 रन | वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल |
| वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट शतक | 13 शतक | एक टीम के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड |
1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा
सुनील गावस्कर 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के अहम सदस्य थे। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी और देश में क्रिकेट को नई पहचान मिली।
कप्तान के रूप में भी दिलाई बड़ी सफलता
बल्लेबाजी के साथ-साथ कप्तानी में भी गावस्कर ने अपनी छाप छोड़ी। उनकी कप्तानी में भारत ने 1985 में ऑस्ट्रेलिया में खेली गई ‘वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट’ का खिताब अपने नाम किया। ये उस समय भारतीय क्रिकेट की बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।
संन्यास के बाद भी क्रिकेट से जुड़े रहे
साल 1987 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी सुनील गावस्कर खेल से जुड़े रहे। वो कई वर्षो से क्रिकेट कमेंट्री कर रहे हैं और अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा वो क्रिकेट विश्लेषण और खेल से जुड़े कई कार्यक्रमों में भी सक्रिय रहते हैं।
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
भारतीय क्रिकेट टीम में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म श्री’ और ‘पद्म भूषण’ जैसे बड़े नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। साल 2009 में उन्हें आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज का नाम ‘बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी’ भी उनके सम्मान में रखा गया है। इसके अलावा बीसीसीआई ने उन्हें कर्नल सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर भारतीय क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान किया।
भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत
सुनील गावस्कर सिर्फ एक महान बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव रखने वाले खिलाड़ियों में भी गिने जाते हैं। आज भी उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं। ‘लिटिल मास्टर’ ने अपने खेल, अनुशासन और समर्पण से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और हमेशा के लिए इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।
