"न करार, न उल्लंघन..." मुजरबानी ने PSL बैन को बताया गलत, तो पाकिस्तान बोर्ड ने भी कर दिया पलटवार

Blessing Muzarabani: आईपीएल को तरजीह देने पर जिम्बाब्वे के गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी और पीसीबी आमने-सामने हैं। मुजरबानी ने बैन को गलत बताया, जबकि बोर्ड ने गैरपेशेवर रवैया बताया।
Blessing Muzarabani vs Pakistan Cricket Board
ब्लेसिंग मुजरबानी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Blessing Muzarabani vs Pakistan Cricket Board: पीएसएल और आईपीएल के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अब जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है। आईपीएल को प्राथमिकता देने के बाद पीसीबी ने मुजरबानी पर बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें अगले दो साल तक पीएसएल में खेलने से प्रतिबंधित कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

पीसीबी का बड़ा फैसला और मुजरबानी की आपत्ति

पीसीबी ने मुजरबानी पर दो साल का बैन लगाते हुए उनके रवैये को गैरपेशेवर बताया है। वहीं मुजरबानी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने कोई आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट साइन ही नहीं किया, तो उसके उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण करार दिया है और अपने फैसले को सही ठहराया है।

मौखिक सहमति बनी विवाद की जड़

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीसीबी से जुड़े सूत्रों ने माना है कि मुजरबानी और पीएसएल फ्रेंचाइजी के बीच कोई लिखित करार नहीं हुआ था, लेकिन मौखिक सहमति जरूर बनी थी। बोर्ड का कहना है कि खिलाड़ी ने ऑफर और शर्तों पर सहमति जताने के बाद किसी दूसरी लीग के साथ जुड़कर अपनी प्रतिबद्धता तोड़ी है, जो नियमों के खिलाफ है।

आईपीएल का ऑफर बना टर्निंग पॉइंट

मुजरबानी को पहले पीएसएल ऑक्शन में कोई खरीदार नहीं मिला था, लेकिन बाद में इस्लामाबाद यूनाइटेड ने उन्हें रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। फ्रेंचाइजी ने इसका ऐलान भी कर दिया था। हालांकि, आधिकारिक कागजी प्रक्रिया पूरी न होने के चलते मुजरबानी ने खुद को पीएसएल से अलग कर लिया। इसके बाद उन्होंने आईपीएल 2026 के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स का ऑफर स्वीकार कर लिया, जहां उन्हें एक खिलाड़ी के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया।

एजेंट ने पीसीबी पर साधा निशाना

मुजरबानी के एजेंट रॉब हंफ्राइज ने भी पीसीबी के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाड़ी ने किसी औपचारिक करार पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, ऐसे में प्रतिबंध लगाना गलत है। उन्होंने इस बैन को बेहद कठोर और अन्यायपूर्ण बताया और इसे हटाने की मांग की है।

एनओसी और कॉन्ट्रैक्ट पर उठे सवाल

हंफ्राइज के अनुसार, मुजरबानी तभी पीएसएल में खेल सकते थे जब उन्हें जिम्बाब्वे क्रिकेट से एनओसी मिलती, जो बिना औपचारिक अनुबंध के संभव नहीं था। उन्होंने दावा किया कि फ्रेंचाइजी के ऐलान के बाद भी दो हफ्ते तक कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिला, जिसके चलते खिलाड़ी ने आईपीएल का विकल्प चुना।

यह मामला अब केवल एक खिलाड़ी और बोर्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह टी20 लीग्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं को भी उजागर करता है। आने वाले समय में ऐसे विवाद और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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