

Bishan Singh Bedi Role In Indian Spin Quartet: आज क्रिकेट की दुनिया बिशन सिंह बेदी की 80वीं जयंती मना रही है, जो इस खेल के सबसे बेहतरीन स्लो लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनरों में से एक थे। 25 सितंबर, 1946 को पंजाब के अमृतसर में जन्मे बेदी का नाम कलात्मकता, शानदार 'फ्लाइट' और बेबाक आजाद सोच का पर्याय बन गया। एक शानदार कप्तान और मेंटर के तौर पर उन्होंने भारतीय क्रिकेट पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी जो आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
एक साधारण परिवार में पले-बढ़े बेदी को अमृतसर के लोकल मैदानों पर क्रिकेट से प्यार हुआ। आधुनिक कोचिंग सुविधाओं के बिना, उन्होंने अपनी 'लूप' और 'स्पिन' को बेहतर बनाने के लिए घंटों खुद से अभ्यास किया।
उनका रास्ता कड़ी मेहनत से बना था। वे अपनी उंगलियों और बांहों की ताकत बढ़ाने के लिए अक्सर अपना क्रिकेट का सामान और कपड़े खुद धोते थे जिससे संसाधनों की कमी उनके शानदार बॉलिंग एक्शन की नींव बन गई।
बेदी ने 1966 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के लिए अपना टेस्ट डेब्यू किया। वे जल्द ही इरापल्ली प्रसन्ना, बीएस चंद्रशेखर और श्रीनिवास वेंकटराघवन के साथ भारत की मशहूर 'स्पिन चौकड़ी' का अहम हिस्सा बन गए। इन सबने मिलकर भारतीय क्रिकेट में क्रांति ला दी और 1970 के दशक में विदेशों में ऐतिहासिक सीरीज जीतीं।
बेदी की बॉलिंग किसी कविता जैसी थी एक सुंदर, लयबद्ध 'रन-अप' और उसके बाद एक धोखा देने वाली डिलीवरी जो हवा में तैरती हुई तेजी से घूमती थी। उन्होंने 22 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी भी की और टीम में एक निडर और प्रतिस्पर्धी रवैया लेकर आए।
खेल के मैदान के बाहर बेदी एक ऐसे इंसान थे जो परिवार को बहुत महत्व देते थे और अपने मिलनसार और बेबाक स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने दो शादियां की थीं। उनकी पहली शादी ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली ग्लेनिथ माइल्स से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे थे - गवासिंदर और गिल। बाद में उन्होंने अंजू इंदरजीत बेदी से शादी की। उनसे भी उनके दो बच्चे हुए जिनका नाम है नेहा और जाने-माने बॉलीवुड एक्टर अंगद बेदी।
बेदी का करियर रिकॉर्ड उनकी महानता को दर्शाता है। उन्होंने 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए, जिसमें 14 बार एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट लेने का कारनामा शामिल है। उन्होंने 1,560 फर्स्ट-क्लास विकेट भी लिए, जो किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेट हैं।
खेल में उनके बड़े योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1970 में पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्हें 2004 में प्रतिष्ठित सी. के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया। हालांकि 23 अक्टूबर, 2023 को उनका निधन हो गया, लेकिन क्रिकेट के एक सच्चे जेंटलमैन और खेल की शुद्धता को बनाए रखने वाले खिलाड़ी के तौर पर उनकी विरासत हमेशा याद रखी जाएगी।