

अर्जुन राजपूत ने महज 80 गेंदों में 11 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 107 रनों की तूफानी पारी खेली।
भारतीय टीम के 42 रन पर 4 विकेट गिर जाने के बाद उन्होंने अकेले दम पर पारी को संभाला।
सहवाग और द्रविड़ के बेटों के फ्लॉप होने के बाद अर्जुन ने टीम को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया।
Arjun Rajput Century Under-19 Asia Cup 2026: अंडर-19 एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले में जालंधर के 19 वर्षीय युवा बल्लेबाज अर्जुन राजपूत ने महज 80 गेंदों में एक ऐतिहासिक शतक जड़कर तहलका मचा दिया है। इस मैच में जब भारतीय टीम महज 42 रन पर 4 विकेट और वहीं एक समय 22 रन पर 3 विकेट खोकर जब बेहद मुश्किल स्थिति में थी,
तब 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए अर्जुन ने बिना किसी दबाव के 11 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 107 रनों की तूफानी पारी खेली। वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के बेटों की नाकामी के बाद अर्जुन ने अकेले दम पर टीम इंडिया को बेहद सम्मानजनक स्थिति में पहुँचाया।
दरअसल, मैच में भारतीय शीर्ष क्रम बुरी तरह फ्लॉप रहा। बेहद दबाव वाले इस मुकाबले में अर्जुन राजपूत ने मैदान पर कदम रखते ही सबसे पहले पारी को संभाला। उन्होंने शुरुआत में संयम दिखाया और सिर्फ 43 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।
फिफ्टी पूरी करते ही अर्जुन ने गियर बदला और पाकिस्तानी गेंदबाजों पर काउंटर अटैक करते हुए मात्र 80 गेंदों में अपना शानदार शतक पूरा कर लिया। वह 107 के स्कोर पर रिजवानुल्लाह का शिकार बने।
आपको बता दें कि बाएं हाथ के होनहार बल्लेबाज और शानदार ऑफ स्पिनर अर्जुन राजपूत पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम होती राम है। अर्जुन ने हरभजन सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट में स्कॉलरशिप के तहत अपने खेल को निखारा।
अपनी प्रतिभा के दम पर वह पंजाब की अंडर-16 टीम के कप्तान बने। इसके बाद वीनू मांकड़ ट्रॉफी और कूच बिहार ट्रॉफी में धमाकेदार प्रदर्शन कर उन्होंने भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाई। अर्जुन एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं, जिन्होंने पिछले मैच में गेंदबाजी करते हुए सिर्फ 8 रन देकर 3 विकेट चटकाए थे।
अर्जुन की यह सफलता उनके परिवार के कड़े संघर्षों की कहानी है। उनके दादा और पिता जालंधर में छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पिता होती राम को बच्चों के स्कूल की फीस भरने के लिए पड़ोसियों और रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ता था। सीमित कमाई के बावजूद होती राम ने कभी अर्जुन के क्रिकेटर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया।
7 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहे अर्जुन के सफर में तब बड़ा मोड़ आया जब हरभजन सिंह की अकादमी बंद हो गई। ऐसे संकट के समय कोच विक्रम सिद्धू ने उनका हाथ थामा। कोच ने अर्जुन का दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में कराया और उनकी स्कूल फीस माफ करवाई, ताकि अर्जुन पर पढ़ाई का आर्थिक बोझ न पड़े और वह क्रिकेट पर ध्यान दे सकें। अर्जुन कहते हैं कि परिवार के इसी त्याग ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।