चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर के सफल 3 साल, बड़े नामों की परवाह किए बिना लिए टीम हित में सबसे कड़े फैसले

Ajit Agarkar ने टीम इंडिया के चीफ सिलेक्टर के रूप में अपने 3 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कड़े फैसले लेकर अपनी जिम्मेदारी मजबूती से निभाई।
Ajit Agarkar
अजीत अगरकर (फोटो- सोशल मीडिया)
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Ajit Agarkar completes 3 years in BCCI selection Committee: अजीत अगरकर ने जब भारतीय क्रिकेट टीम की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला था, तब परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। उस समय चयन समिति को लेकर काफी विवाद भी सामने आए थे। अगरकर को यह जिम्मेदारी चेतन शर्मा की जगह दी गई थी, जिन्हें एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए पकड़े जाने के बाद पद से हटाया गया था। ऐसे माहौल में अगरकर ने चयन समिति की कमान संभाली और पिछले तीन सालों में कई अहम और साहसिक फैसले लिए।

तीन साल के इस कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे निर्णय लिए जिनकी शुरुआत में आलोचना हुई, लेकिन बाद में उनके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। यही वजह है कि अगरकर का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट में काफी चर्चित रहा है।

चयनकर्ता की भूमिका आसान नहीं

क्रिकेट में चयनकर्ता की भूमिका अक्सर विकेटकीपर की तरह मानी जाती है। जब कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करता है तो चयनकर्ताओं को थोड़ी बहुत सराहना मिलती है, लेकिन किसी खिलाड़ी के चयन या बाहर किए जाने पर गलती होने पर तीखी आलोचना भी झेलनी पड़ती है। अगरकर के सफर में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दरअसल, 2020-21 में भी चयन समिति के अध्यक्ष का पद खाली हुआ था और अगरकर ने इसके लिए आवेदन किया था। हालांकि उस समय चेतन शर्मा को यह जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में 2023 में आखिरकार अगरकर को यह पद मिला और तब से वे लगातार अपने फैसलों को लेकर सुर्खियों में बने रहे।

भारतीय चयनकर्ताओं में खास पहचान

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई चयन समिति अध्यक्षों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिलीप वेंगसरकर और कृष्णमाचारी श्रीकांत के प्रभावशाली कार्यकाल के बाद अजीत अगरकर भी उन अध्यक्षों में शामिल हो गए हैं जिनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा है। अगरकर के तीन साल के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने आईसीसी के चार बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल में जगह बनाई। इनमें 2023 का वनडे विश्व कप, 2024 का टी20 विश्व कप, 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 का टी20 विश्व कप शामिल हैं। अगर भारत न्यूजीलैंड को हराकर यह फाइनल जीतता है तो पिछले तीन साल में यह उसकी तीसरी आईसीसी ट्रॉफी होगी।

कठिन फैसले लेने से नहीं हिचके अगरकर

टीम की सफलता का श्रेय अक्सर खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को दिया जाता है, लेकिन सही टीम संयोजन बनाने में चयनकर्ताओं की भूमिका भी बेहद अहम होती है। अगरकर के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए गए जिनके लिए मजबूत सोच और साहस की जरूरत थी। हार्दिक पंड्या की जगह सूर्यकुमार यादव को टी20 टीम का कप्तान बनाना ऐसा ही एक बड़ा फैसला था। इसके अलावा वनडे टीम की कप्तानी से रोहित शर्मा को हटाने का फैसला भी काफी संवेदनशील माना गया। इन दोनों निर्णयों को लेकर काफी चर्चा और आलोचना भी हुई, लेकिन अगरकर ने इनका डटकर सामना किया।

मजबूत सोच के साथ बनी चयन समिति

अगरकर के मुताबिक टीम चुनना सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं होता। इसके लिए खिलाड़ियों की क्षमता को पहचानना, उनकी भूमिका को समझना और टीम की रणनीति में उनकी फिटिंग को परखना बेहद जरूरी होता है। अगरकर की अगुवाई में चयन समिति ने इसी सोच के साथ काम किया। इस दौरान उनकी टीम में एस शरथ, सुब्रतो बनर्जी, एसएस दास और अजय रात्रा जैसे सदस्य शामिल रहे। बाद में एस शरथ की जगह प्रज्ञान ओझा और सुब्रतो बनर्जी की जगह आरपी सिंह को समिति में शामिल किया गया।

इन तीन वर्षों में अगरकर और उनकी चयन समिति ने भारतीय क्रिकेट के लिए कई अहम फैसले लिए और टीम को लगातार बड़े टूर्नामेंटों में मजबूत स्थिति में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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