Explainer: कॉमनवेल्थ में हिस्सा क्यों नहीं लेता अमेरिका, ओलंपिक से कैसे अलग है कॉमनवेल्थ गेम्स? जानें सब कुछ

Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक दिखने में समान हैं, लेकिन नियम, सदस्य देश, खेल और महत्व अलग हैं। जानिए अमेरिका इसमें हिस्सा क्यों नहीं लेता और दोनों में क्या अंतर है।
Commonwealth Games vs Olympic Differences
ओलंपिक से अलग है कॉमनवेल्थ गेम्स (AI जनरेटेड इमेज)
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Commonwealth Games vs Olympic Differences: यूरोपीय देश स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में इस समय कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 खेले जा रहे हैं। हर चार साल में होने वाले इस बहु-खेल आयोजन में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक दोनों बहु-खेल प्रतियोगिताएं हैं, जिनमें अलग-अलग देशों के खिलाड़ी पदक जीतने के लिए मुकाबला करते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन बहुत हद तक ओलंपिक जैसा होता है, लेकिन इसके बाद भी यह ओलंपिक से कई मायनों में अलग है।  दोनों में कई समानताएं होने की वजह से लोग अक्सर इन्हें एक जैसा मान लेते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर एक आम धारणा है कि इसमें वो देश हिस्सा लेते हैं जो किसी समय पर ब्रिटेन की कॉलोनी रहे हैं। लेकिन सच सिर्फ इतना नहीं है। दोनों कार्यक्रमों की शुरुआत, नियम, भाग लेने वाले देशों और महत्व में कई बड़े अंतर हैं।आइए आपको बताते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक कैसे अलग हैं।? साथ ही यह भी कि भारत की तरह अमेरिका भी ब्रिटेन की गुलाम रहा है फिर वो क्यों इसमें हिस्सा नहीं लेता है?

हर चार साल में होता है आयोजन

दोनों का आयोजन चार-चार साल के अंतराल पर होता है और इनमें उद्घाटन समारोह, समापन समारोह, मार्च पास्ट और पदक तालिका जैसी व्यवस्थाएं लगभग एक जैसी दिखाई देती हैं। यही वजह है कि पहली नजर में दोनों आयोजन काफी समान लगते हैं, लेकिन इनके उद्देश्य और दायरे में बड़ा फर्क है।

Commonwealth Games vs Olympic Differences
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेला जा रहा कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (सोर्स- सोशल मीडिया)

सबसे बड़ा अंतर इन आयोजनों को संचालित करने वाली संस्थाओं का है। ओलंपिक खेलों का आयोजन इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) कराती है, जिसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के लोजान में है। वहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (CGF) करता है। दोनों संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र हैं और खेलों के नियम, मेजबानी और प्रतियोगिता से जुड़े फैसले अलग-अलग तरीके से लेती हैं।

भाग लेने वाले देशों में सबसे बड़ा अंतर

Commonwealth Games vs Olympic Differences
भाग लेने वाले देशों में सबसे बड़ा अंतर (AI जनरेटेड इमेज)

ओलंपिक में दुनिया के लगभग सभी मान्यता प्राप्त देशों को हिस्सा लेने का मौका मिलता है। मौजूदा समय में 200 से अधिक देशों के खिलाड़ी इसमें भाग लेते हैं। इसके विपरीत, कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल वही देश और क्षेत्र शामिल होते हैं, जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे हैं और अब कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं। इसलिए यहां भाग लेने वाले देशों और क्षेत्रों की संख्या करीब 70 से 72 के बीच रहती है।

अमेरिका कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा क्यों नहीं लेता?

अमेरिका कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं लेता क्योंकि वह कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस का सदस्य नहीं है। कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल सदस्य देशों और कुछ सदस्य क्षेत्रों के खिलाड़ी ही भाग ले सकते हैं। अमेरिका ने 1776 में ब्रिटेन से आजादी हासिल कर ली थी और बाद में उसने कॉमनवेल्थ की सदस्यता नहीं ली। इसलिए उसे इस प्रतियोगिता में खेलने की पात्रता नहीं मिलती। हालांकि अमेरिका ओलंपिक, पैन अमेरिकन गेम्स और अन्य वैश्विक खेल आयोजनों में नियमित रूप से हिस्सा लेता है। यानी कॉमनवेल्थ गेम्स में भागीदारी का आधार खेल क्षमता नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस की सदस्यता है।

ग्रेट ब्रिटेन और कॉमनवेल्थ का अलग नियम

Commonwealth Games vs Olympic Differences
ग्रेट ब्रिटेन के लिए अलग है कॉमनवेल्थ गेम्स के नियम (AI जनरेटेड इमेज)

कॉमनवेल्थ गेम्स की एक खास बात यह है कि इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड अलग-अलग टीमों के रूप में हिस्सा लेते हैं। जबकि ओलंपिक में यही चारों मिलकर ग्रेट ब्रिटेन के नाम से एक संयुक्त टीम बनाते हैं। यही अंतर लोगों के बीच सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करता है, क्योंकि एक ही क्षेत्र के खिलाड़ी दो अलग-अलग आयोजनों में अलग तरीके से प्रतिनिधित्व करते हैं।

समर और विंटर संस्करण में भी अंतर

ओलंपिक खेलों के दो प्रमुख संस्करण होते हैं समर ओलंपिक और विंटर ओलंपिक। समर ओलंपिक में पारंपरिक खेल शामिल होते हैं, जबकि विंटर ओलंपिक में स्कीइंग, आइस हॉकी और फिगर स्केटिंग जैसे बर्फ पर खेले जाने वाले खेल होते हैं। दूसरी ओर, कॉमनवेल्थ गेम्स का केवल एक ही प्रमुख संस्करण आयोजित किया जाता है और इसका कोई अलग विंटर संस्करण नहीं है।

प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा का स्तर

ओलंपिक पदक को किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें दुनिया के लगभग सभी शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। प्रतिस्पर्धा का स्तर बेहद ऊंचा होता है और हर पदक के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भी मजबूत प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन इसमें भाग लेने वाले देशों की संख्या सीमित होने के कारण इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा ओलंपिक जितनी नहीं मानी जाती।

दोनों आयोजनों में एथलेटिक्स, तैराकी, मुक्केबाजी और बैडमिंटन जैसे कई खेल समान हैं। लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन बॉल्स और नेटबॉल जैसे खेल भी शामिल किए जाते हैं, जो ओलंपिक का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, ओलंपिक में स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइम्बिंग जैसे आधुनिक खेल शामिल हैं, जिन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह नहीं मिली है। इसलिए दोनों आयोजनों का खेल कार्यक्रम भी अलग-अलग होता है।

लोग कंफ्यूज क्यों हो जाते हैं?

दोनों आयोजनों का स्वरूप काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। उद्घाटन और समापन समारोह, खिलाड़ियों का मार्च पास्ट, पदक तालिका और "गेम्स" शब्द का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करता है। इसके अलावा कई खिलाड़ी दोनों प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं, जिससे भी आम दर्शकों को लगता है कि दोनों आयोजन एक ही तरह के हैं। हालांकि, इनके नियम, सदस्य देश और महत्व पूरी तरह अलग हैं।

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