नवभारत संपादकीय: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, होर्मुज की नाकाबंदी से सभी को नुकसान
Hormuz Strait Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर संकट गहराया है। अमेरिका-ईरान तनाव से महंगाई बढ़ने की आशंका है।
- Written By: अंकिता पटेल
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट( सोर्स: सोशल मीडिया )
US Iran Oil Tensions: यदि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप में दूरदर्शिता होती, तो वह होमुंज की खाड़ी की नाकाबंदी नहीं करते। इससे ऊर्जा कीमतें व महंगाई और बढ़ेगी जिससे अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान पहुंचेगा।
ईरान ने इसे लेकर अमेरिका को चेतावनी दी है कि अभी यदि 4 से 5 डॉलर प्रति गैलन में गैसोलिन (पेट्रोल) मिल रहा है तो शीघ्र ही वह भी मिलना बंद हो जाएगा।
गत सप्ताह संघर्ष विराम के बाद क्रूड ऑयल के दाम कुछ उतरे थे जो फिर 7 प्रतिशत बढ़ गए, यदि फिर शत्रुता में उबाल आया तो क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकता है, यदि अमेरिका होर्मुज से ईरानी तेल लाने वाले टैंकरों को रोकता है तो इंरान भी अन्य खाड़ी देशों के टैंकरों को शांतिपूर्वक खाड़ी से गुजरने नहीं देगा।
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युद्ध शुरू होने के पहले होर्मुज खाड़ी से प्रतिदिन 150 जहाज गुजरते थे। क्या अमेरिका सुरक्षा की गारंटी के साथ वहां से रोज 100 जहाजों को भी जाने दे सकता है? समझौता वार्ता विफल हो जाने के बाद ट्रंप ने होर्मुज की पूरी तरह नाकाबंदी की घोषणा की है।
ऐसे में क्या अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा के बावजूद जहाज वहां से निकलने की जोखिम उठाएंगे? ईरानी तेल भरे हुए टैंकरों का अमेरिका क्या करेगा? क्या वह उन्हें डुबो देगा या जब्त करेगा? दूसरा प्रमुख मुद्दा यह है कि ईरान के तेल का सबसे बड़ा आयातकर्ता देश चीन है।
डोनाल्ड ट्रंप इन जहाजों को रोककर चीन से सीधा टकराव मोल लेगा, चीन पर पहले ही उन्होंने भारी टैरिफ लगाया है और अगले माह चीन की यात्रा पर भी जाने वाले हैं। ऊर्जा की ऊंची दरें अमेरिकी जनता को भी प्रभावित कर रही हैं।
तनाव बढ़ाने की बजाय युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता चुनना बेहतर होगा। भारत अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत एलपीजी विदेश से मंगाता है। इसमें से 90 प्रतिशत होर्मुज से होकर आती है।
ईरान अपनी समुद्र तटीय भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए होर्मुज पर नियंत्रण कायम रखना चाहता है तो अमेरिका का प्रयत्न है कि समुद्र में ईरान को अकेला या अलग-थलग कर दे।
अमेरिका कभी भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्मित समुद्र संबंधी कानून में शामिल नहीं हुआ। ईरान ने इस कानून पर हस्ताक्षर किए लेकिन कभी इसकी पुष्टि नहीं की। होमुंज एक अंतरराष्ट्रीय खाड़ी है।
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उसे कोई स्थानीय सुरक्षा गलियारा नहीं कहा जा सकता जिसे कोई देश अपनी मर्जी से नियंत्रित करे। ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। नाकाबंदी को युद्ध का कृत्य माना जाता है।
ईरान ने होर्मुज को अपना प्रमुख अख बना रखा है जबकि अमेरिकी नौसेना किसी या सभी जहाजों को इस खाड़ी से निकलने या इसमें प्रवेश करने से रोकेगी। ब्रिटेन और फ्रांस ने अमेरिका को सहयोग देने से मना कर दिया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
