Parliament Women Representation Reform( Source: Social Media )
Parliament Women Representation Reform: 21वीं सदी की विकास यात्रा में हमारा भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं।
यह ऐसा अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी। यह ऐसा समय है, जब हमारे देश की संसद को एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाना है।
उसे ऐसा कदम आगे बढ़ाना है, जो हमारे लोकतंत्र को अधिक व्यापक एवं और अधिक प्रतिनिधिक बनाए, संसद का यह निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई शक्ति देगा और लोकसभा और विधानसभाओं संस्थाओं में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करेगा।
16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा।
यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। हमारी नारीशक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है।
आज देश के हर सेक्टर में नारीशक्ति मिसाल बन रही है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी से लेकर एंटरप्रेन्योरशिप तक, खेल के मैदान से लेकर सशख बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं।
हमारी माताएं-चहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब माताओं-बहनों को आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलते हैं।
इसी सोच के साथ बीते 11 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है, इसके लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है।
इन सारे प्रयासों के बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है। इस कमी को अब दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं, तो उनका अनुभव और विजन बहुत काम आता है, क्वालिटी ऑफ गवर्नेस में सुधार भी होता है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, ये हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, अधिक संतुलित और अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास है। सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।
यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है। अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं, महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है।
हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए, विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है।
यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो। आज भारत पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
इसलिए ये जरूरी है कि हमारी संस्थाएं सभी नागरिकों, विशेष रूप से हमारी आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें। इससे न सिर्फ दशकों पुराना संकल्प पूरा होगा, बल्कि विकास की गति को बनाए रखने में भी बहुत मदद मिलेगी।
संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है। में सभी दलों के सांसदों से हमारी नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं।
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हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
लेख-भारत, प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी के द्वारा