अंबानी के खिलाफ सख्त फैसले से 9,00,000 निवेशकों को क्या मिला?
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी के विरुद्ध अपने कड़े फैसले से उद्योगपतियों को कड़ा संदेश देते हुए अनिल अंबानी पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी के इस फैसले के बाद अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आना ही था।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी के विरुद्ध अपने कड़े फैसले से उद्योगपतियों को कड़ा संदेश देते हुए अनिल अंबानी पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, साथ ही अगले पांच वर्षों तक के लिए उन्हें शेयर बाजार की किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने के लिए बैन कर दिया गया है।
यही नहीं, उनकी रिलायंस होम फाइनेंस कंपनी पर जिसके प्रबंधकों के जरिये अनिल अंबानी ने 8,800 करोड़ रुपये का कार्पोरेट गबन किया, उस आरएचएफएल को अगले 6 महीनों के लिए शेयर बाजार से बाहर कर दिया है। साथ ही उस पर भी 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस धोखाधड़ी में शामिल अमित बापना पर 27 करोड़ रुपये, रवींद्र सुधालकर 26 करोड़ रुपये और पिंकेश आर शाह पर 21 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ये सब आरएचएफएल के प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी थे।
शेयर में भारी गिरावट
सेबी के इस फैसले के बाद अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आना ही था, इस कारण अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रा, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस पावर के शेयरों में क्रमश: 14 फीसदी, 5।12 फीसदी और 5।01 फीसदी की गिरावट देखी गई। मार्च 2018 में आरएचएफएल के शेयर की कीमत 60 रुपये प्रति शेयर थी, लेकिन जब मार्च 2022 में इस काली करतूत का पर्दाफाश हो गया कि कैसे अनिल अंबानी ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की चेतावनियों के बावजूद अपने प्रबंधकों के साथ मिलीभगत करके इतना बड़ा कार्पोरेट गबन किया है।
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उसके बाद उसी आरएचएफएल के शेयरों की कीमत घटकर मात्र 75 पैसे रह गई। इससे आरएचएफएल में निवेश करने वाले नौ लाख से ज्यादा आम निवेशकों का भारी नुकसान हुआ, जिन्होंने इस भरोसे पर शेयर बाजार में एक बड़े कार्पोरेट घराने की कंपनी पर निवेश किया था कि अगर कंपनी कुछ गड़बड़ करेगी तो उस पर नजर रखने के लिए सेबी तो है ही। लेकिन सेबी न तो कार्पोरेट जगत की इस काली करतूत के समय रहते भांप पाई और न ही बाद में अपने तथाकथित सख्त फैसले से उन नौ लाख निवेशकों का रत्तीभर भला कर पाई।
लाखों लोग बरबाद हुए
इससे नौ लाख उन निवेशकों को क्या फायदा होगा, जो इस धोखेबाज उद्योगपति की बदनीयत के चलते बर्बाद हो गये? हिंदुस्तान में बड़ी तादाद ऐसे निवेशकों की है, जो किसी कंपनी पर भरोसा कर लिया तो उस पर आंख मूंदकर अपनी सारी निवेश पूंजी लगा देते हैं। हालांकि आरएचएफएल के डूबने से कितने निवेशकों की कितनी पूंजी डूबी, ठीक इस का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है।
आमतार पर यह देखा गया है कि जब किसी कंपनी का शेयर इस कदर ध्वस्त होता है तो उसमें 20 से 25 फीसदी आम निवेशक पूरी तरह से बर्बाद हो जाते हैं, तो अगर नौ लाख निवेशक पूरी तरह से आरएचएफएल के डूबने से नहीं डूबे होंगे तो भी कम से कम दो से ढाई लाख निवेशक तो ऐसे रहे ही होंगे, जिसकी इस धोखाधड़ी पूरी तरह से कमर टूट गयी होगी।
सेबी के इस सख्त फैसले से उस आम निवेशक को क्या फायदा हुआ, जिसकी सुरक्षा के लिए सेबी जैसी रेगुलेटरी का गठन किया गया था। अनिल अंबानी की निजी संपत्ति आज भी 8 हजार करोड़ से कम नहीं है। अगर वाकई सेबी आम निवेशकों के दर्द को समझ रही होती, तो ऐसी व्यवस्था जरूर करती। जिससे अपनी खून-पसीने की कमाई गंवा देने वाले निवेशकों से धोखाधड़ी करने वालों को सचमुच का सबक मिलता।
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कोई राहत नहीं
कोई नहीं जानता कि ये जो 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है, उस जुर्माने के रूप में वसूली गई रकम से क्या होगा? लेकिन यह भी कहीं नहीं खुलासा किया गया कि उस रकम से निवेशकों की कोई भरपायी होगी। भरपाई तो हो भी नहीं सकती, क्योंकि गबन तो 8,800 करोड़ रुपये का है और इतनी बड़ी रकम के गबन के बाद जो कंपनी के पूंजीकरण नुकसान हुआ होगा, वह इससे भी कहीं ज्यादा होगा।
कहने का मतलब यह है कि आरएचएफएल के शेयर के 60 रुपये से टूटकर 75 पैसे आ जाने पर वास्तव में निवेशकों का कितना नुकसान हुआ होगा। वह कम से कम गबन की धनराशि से तो ज्यादा ही होगा। कुल मिलाकर अनिल अंबानी के विरुद्ध आया फैसले को मीडिया कितना ही सख्त फैसला क्यों न कह रही हो, लेकिन इस सख्त फैसले का न तो उन पीड़ितों को कोई फायदा हुआ है, जो कंपनी की धोखाधड़ी के कारण बर्बाद हो गये और समय पर यानी घोटाले से पूर्व इसे न पकड़ पाने के कारण मौजूदा आम निवेशकों को भी किसी तरह की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा नहीं महसूस होगी कि उनका निवेश सुरक्षित है।
लेख- लोकमित्र गौतम
