नवभारत संपादकीय: बंगाल में राजनीतिक हिंसा तेज, चुनाव के बाद भी बंगाल में खून खराबा

Bengal Political Postpoll Clash: बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद फिर हिंसा भड़क उठी है। बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की मौतों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और कई इलाकों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
Navabharat Editorial: Political Violence Intensifies in Bengal; Bloodshed Continues Even After the Elections
बंगाल चुनाव हिंसा,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bengal Political Violence Deaths: यद्यपि केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी व निगरानी में बंगाल के विधानसभा चुनाव करा लिए गए और चुनाव के दोनों चरणों में काफी हद तक शांति बनी रही, लेकिन अब फिर वहां खून खराबा हो रहा है, जो चिंताजनक है। बंगाल के संभावित मुख्यमंत्री च बीजेपी नेता शुभेदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (पीए) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कोलकाता में विजय जुलूस के दौरान कुछ उपद्रवियों ने बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की पीट-पीटकर जान ले ली। हिंसा में अब तक 5 लोगों की मौत हुई है।

जिनमें बीजेपी और टीएमसी दोनों के कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रतिशोध की भावना की वजह से यह हिंसा हो रही है। कहीं जीत का उत्साह है तो कहीं हार की वजह से उमड़ा गुस्सा। हिंसक तत्वों को गिरफ्तार किया जा रहा है। बीजेपी के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति असम्मान न जताएं तथा टीएमसी के कार्यकर्ताओं को निशाना न बनाएं, हमें सिर्फ सरकार बदलने के लिए जनादेश नहीं मिला है, बल्कि भयमुक्त राजनीति का नया अध्याय लिखने की भी हमारी जिम्मेदारी है।

इसके विपरीत भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेद् अधिकारी ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि वह केवल उन्हें बोट देने वाले हिंदुओं के लिए काम करेंगे न कि मुस्लिमों के लिए जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया। बंगाल में हिंसा और बम धमाकों का सिलसिला काफी पुराना है।

माकपा के 34 वर्ष के शासन में यही चलता था और फिर उन्हें सत्ता से हटाने वाली ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने भी यही बम-संस्कृति अपनाई, टीएमसी के गुंडों ने सिंडीकेट बना दिया था, जो खुलेआम वसूली करता था। यही सिंडीकेट पार्टी की पराजय का कारण बना। उसका विरोध करने वाले की शामत आ जाती थी। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसीलिए बंगाल की जनता को भयमुक्त शासन देने का वादा किया था। चुनाव में बीजेपी की जीत के बावजूद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने की हठ की वजह से भी टीएमसी लडाकू तेवर दिखा रही है।

नई सरकार बनने तक संक्रमण काल की स्थिति चल रही हैं जिसमें पुलिस प्रशासन भी लाचार है। वह किसका आदेश सुने? इसलिए निर्वाचन के बाद भी उपद्रवी तत्व हिंसाचार में लिप्त है। शुभेदु अधिकारी ने निर्देश दिया कि जब तक बीजेपी किसी को पार्टी सदस्य न बनाए वह खुद को भाजपाई नहीं कह सकता।

बंगाल में मौका देखकर अपराधी तत्व सत्तारूढ़ पार्टी में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। इनसे पाटों को सतर्क रहना होगा। हिंसा की घटनाओं पर यथाशीघ्र काबू पाना होगा। ताकि लोगों का कानून-व्यवस्था में विद्यास बना रहे। सांप्रदायिक ताकतों को भी नियंत्रित रखना होगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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