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Mamata Modi Fish Issue: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, बंगाल विधानसभा चुनाव में मछली अहम मुद्दा बन गई है। मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनजों ने कहा कि बीजेपी यह तय करना चाहती है कि किस प्रदेश के लोग क्या खाएंगे-पिएंगे, प्रधानमंत्री मोदी बता रहे हैं कि मछली का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए जबकि उनकी पार्टी के बयान यह बताते रहे हैं कि वह लोगों के मांस-मछली खाने के खिलाफ हैं।’
हमने कहा, ‘बीजेपी के सामान्य नेता क्या कहते हैं, इससे मतलब नहीं। वही होता है जो मंजूर-ए-मोदी होता है। पीएम ने कहा कि बंगाल में मछली का उत्पादन कम हो गया है। अगर बीजेपी की सरकार आई तो विशेष योजनाएं शुरू कर मछली उत्पादन बढ़ाया जाएगा।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मछली समुद्र तट के राज्यों का प्रमुख खाद्य है। मछली पकड़ने के लिए मछुआरे अपनी नौकाओं से समुद्र में दूर-दूर तक जाते हैं। कुछ लोग नदी किनारे बैठकर पानी में बन्सी डालकर देर तक प्रतीक्षा करते हैं कि चारे के लालच में कोई मछली फंस जाएगी। चुनाव लड़ने वाले नेताओं के लिए भी सारे मतदाता मछली के समान होते हैं जिन्हें लुभावने वादों व खैराती योजनाओं का चारा डालकर फंसाया जाता है। कोई मछली खुद ही फंसना चाहती है। बुद्धिनाथ मिश्र की कविता है एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, क्या जाने किस मछली में फंसने की आस हो! लोग घर में फिश पॉन्ड रखकर रंगबिरंगी लाल-सुनहरी मछली पालते हैं। इसे लकी माना जाता है। उसके लिए विशेष फूड डालना पड़ता है।’
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हमने कहा, ‘मछली का महत्व कम नहीं है। पुराणों में उल्लेख है कि भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। महाराज मनु जब नदी में स्नान कर रहे थे तो उनकी अंजुली में एक मछली आ गई। उसे उन्होंने छोटे से जलाशय में डाल दिया। उसका आकार तेजी से बढ़ता गया तो उसे पहले तालाब और फिर समुद्र में डालना पड़ा। जब प्रलय हुआ और धरती डूब गई तो यही मछली मनु की बहुत बड़ी नौका को हिमालय तक खींचकर ले गई। यही कहानी बाइबिल में ‘नोआर्ज आर्क’ के नाम से है। उस विशाल मछली ने पृथ्वी के सभी जीवों की रक्षा की थी। बच्चे भी नर्सरी राइम गाते हैं, मछली जल की रानी है, जीवन इसका पानी है, हाथ लगाओ डर जाएगी, बाहर निकालो मर जाएगी।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा